शिमला , अप्रैल 10 -- हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने दो पूर्व विधायकों को पेंशन और एरियर जारी करने का निर्देश दिया है।
अदालत के इस फैसले से उन याचिकाकर्ताओं को राहत मिली है, जिन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले लाभों को रोके जाने को चुनौती दी थी।
न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति रंजन शर्मा की पीठ ने राजेंद्र राणा और रवि ठाकुर की ओर से दायर दो संबंधित नागरिक रिट याचिकाओं का निपटारा किया।
पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलों और विधायकों की पेंशन से संबंधित राज्य के विधायी ढांचे में हुए बदलावों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला सुनाया।
सुनवाई के दौरान हिमाचल प्रदेश विधानसभा का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील ने आधिकारिक निर्देश रिकॉर्ड पर रखे। इसमें बताया गया कि राज्य सरकार ने पिछले कानून, 'हिमाचल प्रदेश विधानसभा (सदस्यों के भत्ते और पेंशन) संशोधन विधेयक, 2024' को वापस ले लिया है। पिछले कानून के तहत अयोग्य घोषित किये गये विधायकों को पेंशन लाभ से वंचित करने का प्रावधान था, जिसे अदालत में चुनौती दी गयी थी।
अदालत को सूचित किया गया कि राज्य विधानमंडल ने वर्ष 2026 में पारित एक नये संशोधन विधेयक में पेंशन पात्रता के संबंध में संशोधित प्रावधान पेश किया है। नये ढांचे के तहत संविधान की दसवीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) के तहत अयोग्य ठहराये गये विधायक पेंशन के हकदार नहीं होंगे।
यह नियम हालांकि भविष्य के लिए लागू किया गया है। इसका मतलब यह है कि यह कानून सिर्फ उन विधायकों पर असर डालेगा जो 14वीं विधानसभा या उसके बाद चुनकर आएंगे। पुराने विधायकों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।
चूंकि दोनों याचिकाकर्ता 12वीं और 13वीं विधानसभा में विधायक के रूप में सेवाएं दी थी , इसलिए वे नये कानून के दायरे में नहीं आते हैं। ऐसे में उनके पिछले कार्यकाल के लिए पेंशन की पात्रता अप्रभावित रहेगी। अदालत ने यह भी देखा कि नया विधेयक वर्तमान में राज्यपाल की मंजूरी के इंतजार में है।
इन दलीलों के मद्देनजर न्यायालय ने हिमाचल प्रदेश विधानसभा सचिव को निर्देश दिया कि वे याचिकाकर्ताओं की देय और स्वीकार्य पेंशन के साथ-साथ बकाया एक महीने के भीतर जारी करें।
पीठ ने अपने फैसले में कहा कि यदि निर्धारित अवधि के बाद कोई देरी होती है, तो संबंधित अधिकारी उस राशि के देय होने की तारीख से पूर्ण और अंतिम भुगतान होने तक छह प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज देने के उत्तरदायी होंगे।
अदालत ने इस बात पर भी जोर दिया कि भविष्य के पेंशन भुगतान का वितरण समय पर किया जाना चाहिए। इन निर्देशों के साथ ही याचिकाओं और सभी लंबित आवेदनों का निपटारा कर दिया गया।
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