शिमला , जुलाई 10 -- हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शुक्रवार को घोषणा की कि राज्य सरकार प्राकृतिक आपदाओं को सहने और जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाले भविष्य के नुकसान को कम करने की राज्य की क्षमता को बढ़ाने के लिए 3,500 करोड़ रुपये का आपदा-सुरक्षित बुनियादी ढांचा विकसित करेगी।

यहाँ डॉ. मनमोहन सिंह हिमाचल प्रदेश लोक प्रशासन संस्थान में "पश्चिमी हिमालय में सुरक्षित बुनियादी ढांचा नियोजन की ओर" विषय पर आयोजित उच्च स्तरीय कार्यशाला के समापन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश अपनी संवेदनशील पर्वतीय भौगोलिक स्थिति और बदलते मौसम के कारण प्राकृतिक आपदाओं के प्रति संवेदनशील होता जा रहा है। उन्होंने जीवन, संपत्ति और अर्थव्यवस्था की सुरक्षा के लिए बुनियादी ढांचा नियोजन में सुरक्षा और मजबूती को शामिल करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

वर्ष 2023 की विनाशकारी आपदा को याद करते हुए श्री सुक्खू ने कहा कि भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन के कारण बड़े पैमाने पर हुई तबाही के बाद राज्य भर में करीब 75 हजार पर्यटक फंस गए थे। उन्होंने कहा कि सरकार ने मंत्रियों, जिला प्रशासनों और विभिन्न एजेंसियों के समन्वित प्रयासों से सभी फंसे हुए पर्यटकों को सुरक्षित बाहर निकालना सुनिश्चित किया और युद्ध स्तर पर आवश्यक सेवाओं को बहाल किया। उन्होंने चंद्रताल झील से फंसे हुए करीब 300 पर्यटकों को निकालने के लिए बचाव अभियान का व्यक्तिगत रूप से नेतृत्व करने के लिए राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी और विधायक संजय अवस्थी की भी सराहना की।

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