धर्मशाला , जून 12 -- टीबी के खिलाफ लड़ाई में पंचायतों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देते हुए हिमाचल प्रदेश में कांगड़ा के अतिरिक्त उपायुक्त विनय कुमार ने गुरुवार को कहा कि टीबी-मुक्त भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सामुदायिक भागीदारी, जन जागरूकता और समय पर इलाज सबसे महत्वपूर्ण हैं।

धर्मशाला में 'टीबी मुक्त भारत अभियान 2.0' के 80वें दिन एक बहु-क्षेत्रीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए श्री कुमार ने कहा कि वर्ष 2025 तक कांगड़ा जिले की 287 पंचायतों को टीबी-मुक्त घोषित किया जा चुका था। इनमें 69 सिल्वर और 37 गोल्ड श्रेणी की पंचायतें शामिल हैं, जो इस जिले को हिमाचल प्रदेश में सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले जिलों में शुमार करती हैं।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में कांगड़ा में टीबी के 2,807 मरीज पंजीकृत किये गये थे, जबकि जनवरी से मई 2026 के बीच 1,180 नये मामलों की पहचान की गयी है। श्री कुमार ने 'टीबी-मुक्त भारत ऐप' और 'खुशी एआई चैटबॉट' भी लॉन्च किया तथा अधिकारियों को सभी टीबी मरीजों को इन डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने का निर्देश दिया।

अतिरिक्त उपायुक्त ने टीबी मरीजों के लिए पोषण संबंधी सहायता पर कहा कि 478 मरीजों को नियमित सहायता मिल रही है तथा वर्ष 2026 के पहले पांच महीनों के दौरान जिले में 2,163 पोषण किट वितरित किये गये थे।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विवेक करोल ने बताया कि पिछले 80 दिनों के दौरान इस अभियान के तहत 225 आयुष्मान आरोग्य शिविर आयोजित किये गये। इससे 13,350 लोग लाभान्वित हुए, जबकि 33,900 एक्स-रे किये गये। उन्होंने कहा कि जिले के 969 उच्च जोखिम वाले गांवों में से 205 गांवों को अब तक इस अभियान के दायरे में लाया जा चुका है।

अधिकारियों ने कहा कि कांगड़ा ने टीबी निवारक उपचार (टीपीटी) के तहत 96 प्रतिशत कवरेज हासिल कर लिया है, जिसके तहत जनवरी और मई 2026 के बीच 1,340 लाभार्थी आये हैं, जबकि बीमारी से जुड़े सामाजिक कलंक को खत्म करने और जागरूकता को मजबूत करने के लिए 393 'टीबी चैंपियंस' को प्रशिक्षित किया गया है।

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