शिमला , अप्रैल 12 -- हिमाचल प्रदेश सरकार ने जलाशयों से पकड़ी गई मछलियों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) शुरू करते हुए रॉयल्टी दरों को घटाकर एक प्रतिशत कर दिया है। इसका उद्देश्य मत्स्य पालन क्षेत्र को मजबूत करना और मछुआरों की आजीविका में सुधार करना है।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा बजट 2026-27 में की गई घोषणा के अनुरूप मत्स्य पालन विभाग इन पहलों को जमीनी स्तर पर लागू करने की तैयारी कर रहा है।
ये उपाय मछुआरों को बाजार के उतार-चढ़ाव से बचाने और उनकी उपज के लिए उचित और सुनिश्चित मुआवजा सुनिश्चित करने के लिए तैयार किए गए हैं। हिमाचल प्रदेश के इतिहास में पहली बार जलाशयों की मछलियों के लिए 100 रुपये प्रति किलोग्राम का एक समग्र एमएसपी तय किया गया है।
यदि नीलामी की कीमत एमएसपी से नीचे गिर जाती है, तो राज्य सरकार प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) तंत्र के माध्यम से 20 रुपये प्रति किलोग्राम तक की सब्सिडी प्रदान करेगी। यह सब्सिडी सीधे पात्र मछुआरों के बैंक खातों में जमा की जाएगी, जिससे पारदर्शिता और समय पर सहायता सुनिश्चित होगी। एक और बड़ी राहत के तौर पर सरकार ने जलाशयों से पकड़ी गई मछलियों पर रॉयल्टी दर को घटाकर केवल एक प्रतिशत कर दिया है।
इससे पहले रॉयल्टी को 15 प्रतिशत से घटाकर 7.5 प्रतिशत किया गया था और इस नवीनतम निर्णय से 6,000 से अधिक मछुआरों को लाभ होने की उम्मीद है क्योंकि इससे उनका वित्तीय बोझ काफी कम होगा और उनकी शुद्ध आय में वृद्धि होगी।
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