शिमला , जून 12 -- हिमाचल प्रदेश ने चरवाहों की रोजी-रोटी में सुधार, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और पूरे राज्य में जंगल और चरागाह संसाधनों का टिकाऊ मैनेजमेंट पक्का करने के उद्देश्य से ग्रेजिंग पॉलिसी-2026 को मंजूरी दी है।

यह पॉलिसी वैज्ञानिक और भागीदारी वाले तरीके से चरवाहों के शासन में सुधार करना चाहती है, साथ ही पारंपरिक चराई के तरीकों को भी बनाए रखना चाहती है, जो हजारों जानवरों पर निर्भर परिवारों का गुजारा करते हैं।

राज्य सरकार के अधिकारी के मुताबिक नयी पॉलिसी चराई पर सख्त पाबंदियों की जगह एक गतिशील प्रणाली लाती है जो जिम्मेदारी से घास के मैदान की उत्पादकता बनाए रखने, मिट्टी के कार्बन स्टॉक को बढ़ाने और जैव-विविधता को बचाने के लिए एक जरूरी उपकरण के तौर पर पहचानती है।

उन्होंने कहा कि इस पहल के तहत वन विभाग, पशुपालन विभाग के साथ मिलकर छह महीने के अंदर एक बड़ा डिजिटल डेटाबेस पोर्टल बनाएगा, जिसमें चरवाहों को अपने नाम, पते, जानवरों की संख्या, पारंपरिक प्रवासी मार्ग और रुकने की जगहों सहित सारे विवरण पंजीकृत करने होंगे।

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