हमीरपुर , सितंबर 14 -- हिमाचल प्रदेश पुलिस सोमवार को राज्य के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाले 'चिट्टा विरोधी जन आंदोलन' के तहत एनआईटी हमीरपुर पहुंची और वहां के युवाओं से 'चिट्टा' (सिंथेटिक ड्रग) के खतरों के बारे में जागरूकता फैलाने और एक साफ़-सुथरे एवं सुरक्षित हिमाचल प्रदेश का संदेश आगे बढ़ाने में मदद करने की अपील की।

एनआईटी सभागार में स्नातक और स्नातकोत्तर छात्रों को संबोधित करते हुए पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी ने कहा कि पिछले साल मुख्यमंत्री के नेतृत्व में शुरू किया गया यह अभियान सिर्फ़ सरकार या पुलिस का अभियान बनकर नहीं रहेगा बल्कि यह राज्य के हर युवा से 'चिट्टा' के ख़िलाफ़ लड़ाई में शामिल होने और इसे जन-आंदोलन बनाने में मदद करने का आह्वान है। अपने कॉलेज के दिनों को याद करते हुए उन्होंने छात्रों से कहा, "अगले कुछ मिनटों तक मुझे सिर्फ़ एक पुलिस वाले या डीजीपी के रूप में न देखें। मुझे एक ऐसे व्यक्ति के तौर पर समझें जिसने उस रास्ते पर आपसे थोड़ा ज़्यादा सफ़र तय किया है जिस पर आप अभी अपनी यात्रा शुरू कर रहे हैं।"श्री तिवारी ने छात्रों को सीखते रहने, आगे बढ़ने और नये मौकों को तलाशने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने उन्हें भरोसा दिलाया कि हिमाचल प्रदेश पुलिस हमेशा युवाओं के साथ है।

एक 25 वर्षीय महिला कॉन्स्टेबल निकिता ने छात्रों के हमउम्र की तरह बात करते हुए संदेश दिया कि अपनी सुरक्षा करें, अपने दोस्तों का ध्यान रखें और आवाज़ उठायें। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे मादक पदार्थों की समस्या से जूझ रहे किसी दोस्त को बुरा-भला न कहें या उसके बारे में गपशप न करें बल्कि उसकी मदद के लिए आगे आएं। साथ ही, उन्होंने इस बात पर बल दिया कि 'चिट्टा' बेचकर पैसे कमाने और युवाओं की ज़िंदगी बर्बाद करने वालों की शिकायत करनी चाहिए और उनके ख़िलाफ़ सख़्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

डीजीपी ने कहा कि पुलिस मादक पदार्थ तस्करों के खिलाफ सख्ती बरतना जारी रखेगी लेकिन यह बड़ी लड़ाई तभी जीती जा सकती है जब छात्र, माता-पिता, शिक्षक और समुदाय मुख्यमंत्री के 'चिट्टा विरोधी जन आंदोलन' में बराबर के साझेदार के रूप में शामिल हों। हमीरपुर में 'चिट्टा विरोधी वॉकथॉन' (मादक पदार्थों के खिलाफ़ पदयात्रा) को याद करते हुए, जिस दौरान वह तीन दिनों तक एनआईटी कैंपस में रुके थे, उन्होंने एनआईटी हमीरपुर के छात्रों को 16 सितंबर को ऊना में होने वाले इस कैंपेन के अगले चरण में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया और सुझाव दिया कि संस्थान छात्रों की एक या दो बसें भेज सकता है।

डीजीपी ने एक एमओयू के माध्यम से एनआईटी हमीरपुर और हिमाचल प्रदेश पुलिस के बीच बेहतर संस्थागत सहयोग का प्रस्ताव भी रखा। एनआईटी के छात्र और संकाय साइबर अपराधा, प्रौद्योगिकी और नवीन पुलिसिंग परियोजनाओं में पुलिस की मदद कर सकते हैं, जबकि हिमाचल पुलिस छात्रों को पुलिसिंग का अनुभव और आईपीएस,एचपीएस व अन्य सेवाओं के ज़रिए करियर के लिए मार्गदर्शन दे सकती है। उन्होंने कहा , "पुलिस समाज से अलग नहीं है। हर वर्दी के पीछे एक इंसान होता है। हम कई काम अच्छे से करते हैं, हमसे गलतियां भी होती हैं, और जब भी हम गलतियां करते हैं, तो उन्हें सुधारने का विनम्र भाव हममें होना चाहिए।"श्री तिवारी ने छात्रों से इस आंदोलन में शामिल होने की अपील की क्योंकि इसके लिए आपकी ऊर्जा, विचारों और आवाज़ की ज़रूरत है। उन्होंने कहा, "आगे आयें और इसमें शामिल हों। सिर्फ़ तमाशबीन न बनें बल्कि अपने दोस्तों, अपनी पीढ़ी और हिमाचल प्रदेश के भविष्य की रक्षा में भागीदार बनें।"चिट्टा विरोधी जन आंदोलन' हिमाचल प्रदेश में शुरू किया गया एक हाई-प्रोफाइल जन-आंदोलन और राज्य-व्यापी नशा-विरोधी अभियान है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा 15 नवंबर, 2025 को शुरू किए गए इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य चिट्टा (सिंथेटिक हेरोइन का एक मिलावटी और बहुत ज़्यादा लत लगने वाला पदार्थ) को खत्म करना है, जो राज्य के युवाओं के लिए तेज़ी से खतरा बनता जा रहा है।

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