दरभंगा , मई 30 -- लित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के सिंडिकेट सदस्य एवं वरिष्ठ शिक्षाविद प्रो. हरिनारायण सिंह ने शनिवार को कहा कि पत्रकारिता जनतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण संस्थाओं में से एक है। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग द्वारा "समाज, राष्ट्र और साहित्य के उन्नयन में हिन्दी पत्रकारिता की भूमिका" विषय पर आयोजित संगोष्ठी एवं सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए प्रो. सिंह ने हिन्दी पत्रकारिता के 200 वर्ष पर जनजागरण से डिजिटल युग तक की चर्चा करते हुए कहा कि हिन्दी पत्रकारिता ने 30 मई 1826 को 'उदंत मार्तंड' के प्रकाशन के साथ अपनी यात्रा शुरू की थी। उन्होंने कहा कि दो सौ वर्षों में इसने स्वतंत्रता आंदोलन, सामाजिक सुधार, राष्ट्रीय एकता और लोकतांत्रिक मूल्यों को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

प्रो. हरिनारायण सिंह ने कहा कि हिन्दी पत्रकारिता ने आम जनता की आवाज बनकर समाज के वंचित वर्गों को अभिव्यक्ति का मंच दिया। हिन्दी पत्रकारिता लोकतंत्र की प्रहरी है और एआई युग में भी इसकी प्रासंगिकता बरकरार है। उन्होंने कहा कि आज डिजिटल और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के दौर में भी इसकी प्रासंगिकता बनी हुई है। निष्पक्षता, सत्य और जनहित इसके मूल मूल्य हैं। हिन्दी पत्रकारिता का यह 200 वर्षीय सफर भारतीय लोकतंत्र की सशक्त विरासत और जनविश्वास का प्रतीक है।

श्री सिंह ने कहा कि पत्रकारिता केवल पेशा नहीं, बल्कि पैशन, कौशल और सामाजिक दायित्व का संगम है। अपने 33 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव को साझा करते हुए प्रो. सिंह ने कहा कि पत्रकारिता करना तलवार की धार पर चलने के समान है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो. उमेश कुमार ने कहा कि 30 मई 1826 को 'उदंत मार्तंड' के प्रकाशन के साथ हिन्दी पत्रकारिता की शुरुआत हुई थी और तब से लेकर आज तक यह समाज एवं राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता समाज का दर्पण है और यह जनहित तथा मानवता की सेवा का प्रभावी माध्यम बनी हुई है।

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