दरभंगा , अगस्त 09 -- ेडरेशन ऑफ ऑब्स्टेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटीज ऑफ इंडिया (फॉग्सी) के देशव्यापी आह्वान पर रविवार को दरभंगा में अभया दिवस मनाया गया। इस अवसर पर दरभंगा ऑब्स्टेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटी के तत्वावधान में चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों एवं महिलाओं के विरुद्ध हिंसा रोकने तथा सुरक्षा, सम्मान और संवेदनशीलता का संदेश देने के लिए जागरूकता रैली निकाली गयी।
रैली स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के गायनी वार्ड से शुरू होकर एमसीएच एवं सर्जिकल ब्लॉक होते हुए अस्पताल अधीक्षक एवं प्राचार्य कार्यालय के सामने से गुजरी और प्रशासनिक भवन परिसर में पहुंचकर सभा में तब्दील हो गयी। इस दौरान चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों ने हिंसा के विरुद्ध जागरूकता संबंधी संदेश दिए।
सभा में वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. भरत प्रसाद का संदेश पढ़कर सुनाया गया, जिसमें महिलाओं, चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों से अपने अधिकारों और सुरक्षा के प्रति सजग एवं सशक्त बनने की अपील की गयी। उन्होंने सरकार, प्रशासन, अस्पताल प्रबंधन, मीडिया एवं समाज सहित सभी संबंधित पक्षों से हिंसा के खिलाफ एकजुट होकर खड़े होने का आह्वान किया।
दरभंगा ऑब्स्टेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटी की अध्यक्ष डॉ. कुमुदिनी झा ने कहा कि हर प्रकार की हिंसा के खिलाफ स्पष्ट रूप से आवाज उठानी होगी। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों को भी अपने व्यवहार और संवाद में सकारात्मक बदलाव लाना चाहिए। रोगियों एवं उनके परिजनों के साथ सहानुभूति, सम्मान और संवेदनशील व्यवहार से चिकित्सक-रोगी संबंध मजबूत होते हैं।
सोसाइटी की सचिव डॉ. राजश्री पूर्वे ने कहा कि प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि वह स्वयं हिंसा से दूर रहे और दूसरों को भी हिंसा से रोके।
स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष डॉ. पूजा महासेठ ने कहा कि महिलाओं, चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा केवल चिकित्सा जगत की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। विवादों का समाधान बातचीत और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से होना चाहिए, हिंसा के जरिए नहीं। उन्होंने अस्पतालों में संवाद, पारदर्शिता, सुरक्षा व्यवस्था और प्रभावी शिकायत निवारण प्रणाली को मजबूत करने पर जोर दिया।
कार्यक्रम के संयोजक वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. ओम प्रकाश ने कहा कि स्वास्थ्यकर्मियों के विरुद्ध हिंसा उनके शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के साथ मरीज की सेवा की गुणवत्ता को भी प्रभावित करती है। उन्होंने कहा कि जब चिकित्सक सुरक्षित और मानसिक रूप से निश्चिंत रहेंगे तभी वे बेहतर चिकित्सा सेवा दे सकेंगे।
कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने महिलाओं, चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों के विरुद्ध हिंसा का विरोध करने तथा समाज में सम्मान, सहानुभूति और संवाद की संस्कृति विकसित करने का सामूहिक संकल्प लिया।
रैली में डॉ. अलका मिश्रा, डॉ. रूही यास्मीन, डॉ. संगीता सिंह, डॉ. मधु सिन्हा, डॉ. अर्चना भारती एवं डॉ. राखी सतपाल सहित बड़ी संख्या में चिकित्सकों एवं स्नातकोत्तर रेजिडेंट चिकित्सक, नर्स एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मी शामिल हुए।
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