नयी दिल्ली , अक्टूबर 27 -- पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने मंगलवार को बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (बीएफआई) के सस्पेंडेड सेक्रेटरी जनरल प्रमोद कुमार को निर्देश दिया कि वे 28 अक्टूबर को होने वाली जनरल बॉडी मीटिंग को 13 नवंबर को अगली सुनवाई तक रोक दें। यह आदेश फेडरेशन प्रेसिडेंट अजय सिंह की याचिका पर दिया गया है।

यह आदेश वर्ल्ड बॉक्सिंग के 23 अक्टूबर के एक ईमेल के बाद आया है, जिसमें इस बात पर ज़ोर दिया गया था कि कोई भी नेशनल फेडरेशन जनरल मीटिंग लागू बीएफआई संविधान के अनुसार ही बुलाई और चलाई जानी चाहिए।

जस्टिस त्रिभुवन दहिया ने आज बीएफआई प्रेसिडेंट की याचिका पर 13 नवंबर के लिए नोटिस ऑफ मोशन जारी किया, जिसमें 8 अक्टूबर के एक नोटिस को चुनौती दी गई है जिसमें उनके खिलाफ नो-कॉन्फिडेंस मोशन का प्रस्ताव दिया गया है और इसके लिए जनरल बॉडी मीटिंग बुलाने का निर्देश दिया गया है।

कोर्ट ने अपने 27 अक्टूबर के आदेश में कहा, "इस बीच, दूसरे रेस्पोंडेंट को अगली सुनवाई की तारीख तक जनरल बॉडी मीटिंग को रोककर रखने का निर्देश दिया जाता है।" ऑर्डर में पिटीशनर की यह बात दर्ज है कि बीएफआई का संविधान प्रेसिडेंट को सिर्फ़ नो-कॉन्फिडेंस मोशन के ज़रिए हटाने की इजाज़त देता है, जिसे जनरल बॉडी के कम से कम तीन-चौथाई सदस्य इस मकसद के लिए खास तौर पर बुलाई गई मीटिंग में सपोर्ट करें। इसमें उनकी यह बात भी दर्ज है कि स्पेशल जनरल मीटिंग सिर्फ़ प्रेसिडेंट या एग्जीक्यूटिव कमेटी के दो-तिहाई सदस्यों के कहने पर ही बुलाई जा सकती है।

बीएफआई ने क्लॉज़ 33(ii) का ज़िक्र किया है, जिसके तहत प्रेसिडेंट अपनी मर्ज़ी से स्पेशल जनरल मीटिंग बुला सकते हैं या एग्जीक्यूटिव काउंसिल के दो-तिहाई सदस्यों के लिखकर कहने पर 30 दिनों के अंदर मीटिंग बुलानी होगी। इस मामले में, इनमें से कोई भी शर्त पूरी नहीं हुई, जिससे पहले के सेक्रेटरी जनरल द्वारा बुलाई गई कथित मीटिंग गैर-कानूनी हो गई।

फेडरेशन ने क्लॉज़ 26(iii) का भी ज़िक्र किया, जिसमें सेक्रेटरी जनरल को सिर्फ़ प्रेसिडेंट की सलाह पर ही जनरल काउंसिल और एग्जीक्यूटिव काउंसिल की मीटिंग बुलाने का नियम है।

बीएफआई ने प्रोसिजरल सेफगार्ड के साथ-साथ क्लॉज 24(xvi), 24(xxviii) और 24(xxxvi) के तहत प्रेसिडेंट की सस्पेंड करने की पावर का भी ज़िक्र किया है। क्लॉज 30 अलग से प्रेसिडेंट को एग्जीक्यूटिव कमेटी के मेंबर्स को सस्पेंड करने की पावर देता है, जो हियरिंग, लिखित कारण, मंज़ूरी और अपील से जुड़ी ज़रूरतों के अधीन है।

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