नैनीताल , अगस्त 13 -- उत्तराखंड में स्ट्रीट वेंडर्स के अधिकारों से जुड़े मामले में उच्च न्यायालय ने नेशनल हॉकर्स फेडरेशन को तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद तय की है।
नेशनल हॉकर्स फेडरेशन और अन्य की ओर से दायर अलग-अलग दायर याचिकाओं पर मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में एक साथ सुनवाई हुई। अदालत ने नेशनल हाकर्स फेडरेशन की याचिका को छोड़कर अन्य याचिकाओं का निस्तारण कर दिया है।
फेडरेशन की ओर से वर्ष 2021 में दायर जनहित याचिका में स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट, 2014 के प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग की गई है। याचिका में वेंडर्स का समय-समय पर सर्वे कराने, टाउन वेंडिंग कमेटी (टीवीसी) का नियमानुसार गठन करने तथा उचित कानूनी प्रक्रिया के बिना स्ट्रीट वेंडर्स को हटाने या उनका सामान जब्त नहीं करने की मांग उठाई गई है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि कानूनी प्रावधानों के अनुसार पहले स्ट्रीट वेंडर्स का सर्वे होना है और इसके बाद टाउन वेंडिंग कमेटी में वेंडर्स के प्रतिनिधियों का निर्वाचन किया जाना है। आरोप है कि कई स्थानों पर निर्वाचन के बजाय चयन के माध्यम से समितियों का गठन किया जा रहा है।
याचिका में सर्वे के दौरान प्रत्येक वेंडर की पहचान, उसकी लोकेशन की जियोटैगिंग और फोटोग्राफी किए जाने तथा इसके बाद वेंडिंग जोन निर्धारित किए जाने की बात कही गई है। यह व्यवस्था नैनीताल के साथ ही हल्द्वानी, देहरादून, हरिद्वार समेत पूरे प्रदेश में लागू किए जाने की मांग की गई है।
इसके अलावा फेडरेशन ने नगर निकायों द्वारा वेंडर्स का सामान हटाने और जब्त करने की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए हैं। याचिका में कहा गया है कि खराब होने वाली सामग्री को नष्ट करने या अन्य सामान जब्त करने से पहले स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट और संबंधित नियमों में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित