नैनीताल , मई 20 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने प्रदेश में बिना वैध अनुमति और यात्रा दस्तावेजों के निवास कर रहे नेपाली मूल के लोगों के मामले में बुधवार को सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से जवाब तलब किया है कि क्या उत्तराखंड के लोगों को नेपाल में वही सुविधाएं उपलब्ध हैं जो राज्य में नेपाली मूल के लोगों को हैं।

नैनीताल निवासी पवन जाटव की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने आज ये निर्देश जारी किये।

खंडपीठ के इस वर्ष 18 मार्च के आदेश के जवाब में आज प्रदेश सरकार की ओर से पूरक शपथपत्र दायर कर कहा गया कि भारत और नेपाल के मध्य वर्ष 1950 में द्विपक्षीय संधि है। इसके तहत दोनों देशों के लोग और वस्तुओं की निर्बाध आवाजाही की अनुमति है।

गैर कानूनी गतिविधियों में संलिप्त लोगों के लिए कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। सरकार के पास हालांकि अदालत के इस सवाल का जवाब नहीं था कि बिना अनुमति और वैध दस्तावेज के कोई बाहरी व्यक्ति यहां निवास कर सकता है।

सरकार की ओर से इस सवाल के जवाब देने के लिए सरकार से निर्देश प्राप्त करने के लिए अदालत से समय की मांग की गयी। अदालत ने सरकार से यह भी पूछा कि क्या भारतीय भी नेपाल में बिना वैध दस्तावेज और अनुमति रह सकते हैं। क्या भारतीयों को भी नेपाल में वही सुविधाएं उपलब्ध है जो नेपाल के लोगों को उत्तराखंड में उपलब्ध हैं।

सरकार को इस मामले में तीन सप्ताह में जवाब देना है। इससे पहले अदालत ने सरकार से राज्य में रह रहे लोगों के संदर्भ में नीति स्पष्ट करने के निर्देश दिए थे। इस मामले में अब तीन सप्ताह बाद सुनवाई होगी।

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