चंडीगढ़ , अगस्त 13 -- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय महासचिव एवं राज्यसभा सदस्य तरुण चुघ ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के फार्मेसी अधिकारियों की भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगाये जाने को पंजाब के लाखों युवाओं की बड़ी जीत बताया और कहा कि न्यायालय के आदेश से भगवंत मान सरकार के उन दावों पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गये हैं, जिनमें सरकार लगातार पेपर लीक से जुड़े आरोपों को खारिज करती रही थी।
श्री चुघ ने गुरुवार को यहां जारी बयान में कहा कि पंजाब में 454 फार्मेसी अधिकारी पदों के लिए जुलाई 2026 में परीक्षा आयोजित की गयी थी। परीक्षा के तुरंत बाद प्रश्नपत्र लीक होने और उसकी गोपनीयता भंग किये जाने के गंभीर आरोप सामने आये। उन्होंने आरोप लगाया कि हजारों अभ्यर्थियों की शिकायतों को गंभीरता से लेने के बजाय आम आदमी पार्टी सरकार ने इसे केवल अनियमितता बताकर मामले से पल्ला झाड़ने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने कुछ कर्मचारियों के निलंबन और बर्खास्तगी को कार्रवाई के तौर पर पेश किया, लेकिन दोबारा परीक्षा कराने से इनकार कर दिया। इसके बाद अभ्यर्थियों को न्याय के लिए उच्च न्यायालय का रुख करना पड़ा।
भाजपा नेता ने कहा कि न्यायालय की कार्यवाही ने अब सरकार के पूरे रवैये पर गंभीर सवाल खड़े किये हैं। अदालत ने परीक्षा प्रक्रिया पर रोक लगाने के साथ-साथ इसके परिणाम घोषित करने पर भी रोक लगा दी है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने शुरुआत में ही छात्रों की शिकायतों को गंभीरता से लिया होता, निष्पक्ष जांच करायी होती और परीक्षा की विश्वसनीयता सुनिश्चित की होती तो हजारों युवाओं को न्याय के लिए अदालत का दरवाजा नहीं खटखटाना पड़ता।
श्री चुघ ने मुख्यमंत्री भगवंत मान और उनकी सरकार से सवाल किया कि पेपर लीक के इतने गंभीर आरोप सामने आने के बावजूद दोबारा परीक्षा कराने से इनकार क्यों किया गया? छात्रों की शिकायतों को गंभीरता से क्यों नहीं लिया गया और मामले में उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप की जरूरत क्यों पड़ी? उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़ी परीक्षा को राजनीतिक नुकसान को नियंत्रित करने और प्रशासनिक लापरवाही की बलि चढ़ाना किसी भी सरकार के लिए शर्मनाक है।
उन्होंने कहा कि जहां पंजाब की आप सरकार पेपर लीक के आरोपों को लगातार नकारती रही, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली राजग सरकार ने देश में परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठाये हैं। उन्होंने कहा कि संसद में नीट परीक्षा पर चर्चा की मांग उठाए जाने पर केंद्र सरकार ने चर्चा से भागने के बजाय सदन में जवाब दिया। परीक्षा में अनुचित साधनों को रोकने के लिए कड़ा कानून बनाया गया और परीक्षा सुधारों के लिए नंदन नीलेकणी के नेतृत्व में विशेषज्ञ कार्यबल का गठन किया गया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी संसद में स्पष्ट किया था कि सरकार पेपर लीक और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है। इसके बावजूद श्री राहुल गांधी और विपक्ष ने चर्चा को आगे बढ़ाने के बजाय संसद की कार्यवाही बाधित करना चुना।
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