नैनीताल , अगस्त 06 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने रुद्रपुर में दुष्कर्म के आरोपियों की कथित रूप से बाजार परेड कराए जाने तथा पहचान उजागर करने और फोटो और वीडियो पुलिस के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किए जाने के मामले को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार, गृह सचिव समेत अन्य पक्षकारों से चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार, प्रमुख सचिव (गृह), पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) तथा पुलिस महानिरीक्षक (कानून एवं व्यवस्था) को पक्षकार बनाते हुए नोटिस जारी किए। मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।
नेशनल पब्लिक सर्विस ट्रस्ट की ओर से दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि हाल के वर्षों में उत्तराखंड पुलिस द्वारा गिरफ्तार या आरोपित व्यक्तियों की सार्वजनिक पिटाई, सड़क पर परेड, मीडिया के सामने पेश करने और बिना चेहरा ढके उनकी फोटो एवं वीडियो आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित करने की घटनाएं बढ़ी हैं। याचिका में दावा किया गया है कि ऐसी कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 22 के तहत प्रदत्त मौलिक अधिकारों तथा दोष सिद्ध होने तक व्यक्ति को निर्दोष माने जाने के सिद्धांत का उल्लंघन है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित