नैनीताल , सितंबर 21 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े लेनदेन के कारण फ्रीज किए गए बैंक खाते के मामले में दो महिलाओं को राहत देते हुए बैंक के समक्ष नया प्रतिवेदन दाखिल करने की अनुमति दी है।
न्यायमूर्ति आलोक महरा की एकलपीठ ने भावना डांगी और अन्य की ओर से दायर याचिका पर यह आदेश 18 सितंबर को पारित किया लेकिन आदेश की प्रति आज उपलब्ध हुई।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि उनके बैंक खाता में ऑनलाइन गेमिंग से संबंधित कुछ लेनदेन पाए जाने के कारण फ्रीज कर दिया गया। मामले में भारतीय स्टेट बैंक को प्रतिवादी संख्या 3 के रूप में शामिल किया गया।
भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की ओर से कहा गया कि यदि याचिकाकर्ता खाते को अनफ्रीज करने के लिए एक नया प्रतिवेदन इस शर्त के साथ प्रस्तुत करें कि लियन केवल ऑनलाइन गेमिंग से जुड़ी विवादित राशि तक सीमित रखा जाए और शेष राशि खाते में अनफ्रीज/जारी कर दी जाए, तो बैंक द्वारा उनके प्रतिवेदन पर कानून सम्मत विचार किया जाएगा।
इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने याचिकाकर्ताओं एक सप्ताह के भीतर बैंक के समक्ष प्रतिवेदन दाखिल करने की अनुमति दी। अदालत ने बैंक को दो सप्ताह के भीतर निर्णय लेने को कहा है। इस मामले में अगली सुनवाई आठ अक्टूबर को होगी। और इस बीच प्रतिवादियों को प्रति-शपथपत्र दाखिल करने को भी कहा गया है।
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