नैनीताल , अक्टूबर 18 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने हरिद्वार के गांव मोहम्मदपुर जट में तालाब की भूमि पर कथित अतिक्रमण से जुड़े मामले में हरिद्वार के जिलाधिकारी को निर्देश दिए हैं कि वह सबसे पहले यह जांच करें कि कहीं याचिकाकर्ता ने खुद सरकारी या जल-निकाय भूमि पर अतिक्रमण तो नहीं किया है।खंडपीठ ने कहा कि इसके बाद ही याचिकाकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों पर विचार होगा। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने 16 अक्टूबर 2026 को ग्रामीण इंदरवीर उर्फ बॉबी की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किये। आदेश की प्रति रविवार को मिली है।
याचिकाकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया कि रुड़की तहसील के गुरुकुल नारसन डाकघर क्षेत्र के गांव मोहम्मदपुर जट में खसरा संख्या 383 की 0.7940 हेक्टेयर भूमि राजस्व अभिलेखों में "तालाब" के रूप में दर्ज है, जिस पर कुछ लोगों ने अतिक्रमण किया है। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत से अतिक्रमण हटाने के निर्देश देने की मांग की गई।
प्रतिवादी पक्ष की ओर से आरोपों को झूठा बताते हुए कहा गया कि जल-निकाय की भूमि पर कोई अतिक्रमण नहीं है। खंडपीठ ने अपने आदेश में याचिकाकर्ता को दो सप्ताह के भीतर जिलाधिकारी को प्रत्यावेदन देने की छूट दी है।
आगे कहा है कि प्रत्यावेदन मिलने पर जिलाधिकारी पहले जांच करेंगे कि याचिकाकर्ता ने सरकारी या जल-निकाय भूमि पर अतिक्रमण किया है या नहीं। यदि याचिकाकर्ता का अतिक्रमण नहीं पाया गया तो डीएम उसके प्रत्यावेदन में उठाए गए मुद्दे पर विचार करेंगे।
अदालत ने यह भी कहा कि जल-निकाय भूमि पर अतिक्रमण पाए जाने पर संबंधित लोगों को सुनवाई का अवसर देकर कानून के अनुसार उसे हटाया जाएगा। यदि याचिकाकर्ता स्वयं सरकारी या जल-निकाय भूमि पर काबिज पाया गया तो जिलाधिकारी सबसे पहले उसका अतिक्रमण हटाएंगे।
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