बैतूल , जून 20 -- मध्य प्रदेश के बैतूल जिले की साहित्यिक प्रतिभा मंजू लंगोटे ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिले का नाम रोशन किया है। हांगकांग में आयोजित अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक सम्मेलन में शोधपत्र प्रस्तुत कर उन्होंने न केवल अपनी साहित्यिक क्षमता का परिचय दिया, बल्कि बैतूल की सांस्कृतिक पहचान को भी वैश्विक मंच तक पहुंचाया।

मध्य रेलवे में सहायक मंडल अभियंता कार्यालय, बैतूल में मुख्य कार्यालय अधीक्षक के पद पर कार्यरत श्रीमती लंगोटे ने अपनी पहली विदेश यात्रा के दौरान इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में भाग लिया। दिल्ली स्थित साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था 'साहित्यशोध संचय फाउंडेशन' के तत्वावधान में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का विषय "वैश्विक विकास में साहित्य एवं संस्कृति की भूमिका" था।

सम्मेलन में देश-विदेश से जुड़े साहित्यकारों, शिक्षाविदों और शोधार्थियों के बीच श्रीमती लंगोटे ने विषय पर अपना शोधपत्र प्रस्तुत किया। उन्होंने अपने अध्ययन में वैश्विक विकास की प्रक्रिया में साहित्य और सांस्कृतिक मूल्यों के महत्व को रेखांकित किया। उनके विचारों और प्रस्तुति को उपस्थित विद्वानों ने सराहा। इसके साथ ही उन्होंने काव्य पाठ भी किया, जिसे श्रोताओं ने काफी पसंद किया।

कार्यक्रम के दौरान उनके उत्कृष्ट योगदान और सक्रिय सहभागिता को देखते हुए आयोजकों ने उन्हें सम्मान पत्र प्रदान किया। साथ ही उनके आलेख को प्रकाशित पुस्तक में स्थान दिया गया और उन्हें 'बेस्ट एनकरेजमेंट अवॉर्ड' से भी सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनकी साहित्यिक प्रतिबद्धता और रचनात्मक योगदान की पहचान माना जा रहा है।

सम्मेलन की अध्यक्षता साहित्यकार डॉ. कुसुमलता मलिक और डॉ. श्रद्धा ने की, जबकि आयोजन की समग्र जिम्मेदारी मनीष सुंदरयाल ने संभाली। इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन में देश के विभिन्न राज्यों से करीब 50 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें विश्वविद्यालयों के व्याख्याता, प्रोफेसर, शोधार्थी और साहित्यकार शामिल थे।

सम्मेलन के समापन के बाद प्रतिभागियों ने हांगकांग के प्रमुख पर्यटन स्थलों का भ्रमण भी किया। इस दौरान उन्हें वहां की संस्कृति, विरासत और आधुनिक विकास को करीब से जानने का अवसर मिला।

श्रीमती मंजू लंगोटे की इस उपलब्धि पर बैतूल के साहित्यिक, सामाजिक और शैक्षणिक क्षेत्रों में खुशी का माहौल है। स्थानीय साहित्यकारों और सामाजिक संगठनों ने इसे जिले के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताते हुए उन्हें बधाई दी है। उनकी सफलता युवा साहित्यकारों और शोधार्थियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रही है।

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