जयंत राय चौधरी सेनयी दिल्ली , मई 29 -- बंगलादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों ने औपचारिक रूप से संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (ओएचसीएचआर) से जुलाई-अगस्त 2024 में बंगलादेश में हुई अशांति पर अपनी विवादास्पद रिपोर्ट को वापस लेने और उसमें सुधार करने की मांग की है।
वकीलों का आरोप है कि संयुक्त राष्ट्र की इस संस्था ने विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी मौतों की संख्या को काफी बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क को संबोधित 28 मई के एक पत्र में लंदन स्थित लॉ फर्म 'डाउटी स्ट्रीट चैम्बर्स' के जाने-माने ब्रिटिश बैरिस्टर स्टीवन पॉवेल्स केसी ने तर्क दिया कि ओएचसीएचआर की फरवरी 2025 की तथ्य-खोज रिपोर्ट 'झूठी और भड़काऊ जानकारी' पर आधारित थी, जिसने हसीना की सरकार को हिंसक रूप से उखाड़ फेंकने को सही ठहराने में मदद की।
ओएचसीएचआर की रिपोर्ट, जिसका शीर्षक 'बांग्लादेश में जुलाई और अगस्त 2024 के विरोध प्रदर्शनों से संबंधित मानवाधिकारों का उल्लंघन और दुर्व्यवहार' था, में अनुमान लगाया गया था कि सरकार विरोधी प्रदर्शनों और उसके बाद हुई सख्ती के दौरान 1,400 तक लोग मारे गए हो सकते हैं।
पत्र में दावा किया गया है कि बंगलादेश की अंतरिम सरकार द्वारा बाद में प्रकाशित एक आधिकारिक गजट में मौतों की संख्या लगभग 834 दर्ज की गई थी, जो संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में बताए गए आंकड़े का लगभग आधा है। हसीना के वकीलों ने यह भी तर्क दिया कि यह संशोधित संख्या भी बढ़ाई-चढ़ाई हो सकती है। उन्होंने बांग्लादेश के छात्रों के नेतृत्व वाले 'भेदभाव-विरोधी आंदोलन' के आंकड़ों का हवाला दिया, जिसमें कथित तौर पर मरने वालों की संख्या लगभग 650 बताई गई थी।
विदेश मंत्रालय के पूर्व सचिव पिनाक आर चक्रवर्ती ने यूनीवार्ता से कहा, "मेरी राय में यूएनएचसीआर बहुत ज़्यादा राजनीतिक हो गया है, जहाँ भू-राजनीतिक विचार अक्सर सामान्य समझ पर हावी हो जाते हैं। एक ब्रिटिश बैरिस्टर का यह पत्र उस विश्वसनीयता की कमी का एक उदाहरण है, जिससे संयुक्त राष्ट्र की यह संस्था अब जूझने लगी है।"इस पत्र की एक प्रति पहले बंगलादेश सरकार के एक पूर्व मंत्री ने इस समाचार एजेंसी को ईमेल की थी। बंगलादेश में 2024 की अशांति की शुरुआत सार्वजनिक क्षेत्र की नौकरियों में कोटा के खिलाफ छात्रों के विरोध प्रदर्शन के रूप में हुई थी, लेकिन यह तेज़ी से एक व्यापक सरकार-विरोधी आंदोलन में बदल गयी। हालाँकि, जैसे-जैसे हिंसा फैली (जिसमें विपक्षी कार्यकर्ताओं ने सरकारी संपत्ति पर हमले किए और इस्लामी समूह भी इस आंदोलन में शामिल हो गए) सरकार ने बलपूर्वक इसका जवाब दिया।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख तुर्क ने बाद में कथित तौर पर कहा, "हमने वास्तव में सेना को चेतावनी दी थी कि यदि वे इसमें शामिल होते हैं, तो इसका मतलब यह होगा कि वे अब (संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में) सैनिक भेजने वाला देशों में नहीं रह पाएँगे।" आलोचकों ने तब से इस टिप्पणी को संयुक्त राष्ट्र के किसी सदस्य देश के आंतरिक मामलों में सीधे तौर पर हस्तक्षेप करने का प्रयास बताया है।
बंगलादेश के पूर्व शिक्षा मंत्री मोहिबुल हसन चौधरी नौफेल ने यूनीवार्ता से कहा, "प्रधानमंत्री शेख हसीना की चुनी हुई सरकार के एक पूर्व मंत्री के तौर पर, और कानून के शासन तथा अंतर्राष्ट्रीय जवाबदेही के प्रति समर्पित एक वकील के तौर पर मेरा मानना है कि बंगलादेश पर ओएचसीएचआर की रिपोर्ट कुछ ऐसे गंभीर सवाल खड़े करती है, जिनकी संयुक्त राष्ट्र महासचिव द्वारा निष्पक्ष जाँच की जानी चाहिए विशेषकर ओएचसीएचआर कार्यालय की निष्पक्षता और कार्यप्रणाली के संबंध में।"सुश्री हसीना के वकीलों द्वारा प्रस्तुत कानूनी दलील में यह आरोप भी लगाया गया कि ओएचसीएचआर के तथ्य-खोज मिशन में स्वतंत्रता का अभाव था, क्योंकि इसे बंगलादेश की अंतरिम सरकार के निमंत्रण पर संचालित किया गया था। इस अंतरिम सरकार का नेतृत्व नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस कर रहे थे, और पत्र में इस सरकार पर राजनीतिक पक्षपात तथा स्वयं मानवाधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है।
वकीलों ने श्री यूनुस की उन सार्वजनिक टिप्पणियों का भी हवाला दिया, जिनमें उन्होंने स्वीकार किया था कि सुश्री हसीना को सत्ता से हटाने वाला आंदोलन एक सावधानीपूर्वक नियोजित, अनुशासित अभियान था। उन्होंने अपने सहयोगी महफूज़ आलम को इस अभियान के आयोजकों में से एक के रूप में पहचाना था। श्री नौफेल ने कहा, "जाँच का सीमित दायरा भी उतना ही चिंताजनक है। इसमें हसीना सरकार को क्रूरतापूर्वक सत्ता से हटाए जाने के बाद हुई हिंसा, राजनीतिक प्रतिशोध, तथा अवामी लीग के समर्थकों और धार्मिक व जातीय अल्पसंख्यकों पर हुए हमलों से संबंधित आरोपों और व्यापक रूप से प्रकाशित समाचार रिपोर्टों को शामिल नहीं किया गया।"पत्र के अनुसार, संरा की रिपोर्ट में बताए गए हताहतों के आँकड़ों ने सुश्री हसीना को शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के सामूहिक नरसंहार के लिए ज़िम्मेदार ठहराने में भूमिका निभायी। बंगालदेश के उच्चतम न्यायालय के वकील एवं बांग्ला फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अबू हेना रज़्ज़ाक ने कहा, "अलग-अलग आँकड़ों से आम बंगलादेशी लोगों के मन में भारी भ्रम पैदा होता है।" ब्रिटिश वकीलों ने ओएचसीएसआर से अनुरोध किया कि संरा मानवाधिकार प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता और गरिमा को बनाए रखने के लिए, रिपोर्ट की गई मौतों की संख्या के संबंध में एक 'सार्वजनिक खंडन और सुधार' जारी किया जाए।
ओएचसीएसआर ने अभी तक इस पत्र पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। अगस्त 2024 के नाटकीय राजनीतिक उथल-पुथल के बाद से बांग्लादेश गहरे तौर पर विभाजित रहा है। इस उथल-पुथल के परिणामस्वरूप, देशव्यापी हिंसक विरोध प्रदर्शनों के कई हफ़्तों के बाद हसीना की सरकार गिर गई और यूनुस के नेतृत्व में एक अंतरिम प्रशासन की स्थापना हुई।
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