मुरादाबाद, मई 31 -- उत्तर प्रदेश की निर्यात नगरी को अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर नई उड़ान देने के लिए जिस मुरादाबाद एयरपोर्ट का सपना दिखाया गया था, वह अब सरकार की अदूरदर्शिता और लचर प्लानिंग की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है।
बड़ी-बड़ी घोषणाओं के साथ शुरू हुई हवाई सेवा अब 'दो कदम आगे और चार कदम पीछे' वाले सिद्धांत पर टिक गई है। मुरादाबाद में मूंढापांडे के भदासना में 35 करोड़ की लागत से बना यह एयरपोर्ट अब किसी सफेद हाथी से कम नहीं है। नवंबर 2024 से बंद पड़ी उड़ानों के बीच अब यह नया संकट खड़ा हो गया है कि प्रदेश में 19 सीटर छोटे विमान उड़ाने वाली दोनों कंपनियां ही चली गईं हैं। ऐसे में करोड़ों के इस प्रोजेक्ट के भविष्य पर सवालिया निशान लग गया है।
हवाई अड्डे की शुरुआत के समय कारोबारियों और महानगर वासियों को सुनहरे सपने दिखाए गए थे कि विदेशी खरीदार सीधे मुरादाबाद पहुंचेंगे, जिससे पीतल कारोबार को पंख लगेंगे। लेकिन हकीकत यह रही कि 10 अगस्त 2024 को शुरू हुई सेवा मात्र 40 दिन ही चल सकी। उस समय कोहरे और लो-विजिबिलिटी की तकनीकी वजह बताकर उड़ानें रोकी गई थीं और मार्च 2025 तक सब दुरुस्त करने का भरोसा दिया गया था, लेकिन डेढ़ साल बीतने के बाद भी स्थितियां सुधरने के बजाय और बिगड़ गई हैं। अब रनवे पर केवल वीआईपी और सरकारी विमान ही उतर रहे हैं, जबकि आम आदमी दिल्ली और लखनऊ के लिए हवाई अड्डे से उड़ान भरने से अभी दूर है।
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