नैनीताल , मार्च 18 -- उत्तराखंड के हल्द्वानी दंगा के मुख्य आरोपी अब्दुल मलिक को बुधवार को फिलहाल जमानत नहीं मिल पायी है। हालांकि हल्द्वानी दंगा के ही मामले में तीन अन्य आरोपियों को दूसरी अदालत से जमानत मिल चुकी है।

मुख्य आरोपी के जमानत प्रार्थना पत्र पर न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा और न्यायमूर्ति आलोक महरा की नवगठित बेंच में सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता की ओर कहा गया कि आरोपी बेकसूर है और उसे गलत फंसाया गया है। वह दो साल से जेल में है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने आशंका जताई कि ग़ैर क़ानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत इस मामले को खंडपीठ सुन सकती है या नहीं। आरोपी की ओर से कहा गया कि 50 से अधिक आरोपियों को खंडपीठ जमानत मंजूर कर चुकी है।

इसके बाद अदालत ने आरोपी से उस नोटिफिकेशन की प्रति उपलब्ध कराने को कहा है जिसके अधिनियम के तहत इसका प्रावधान किया गया है। अदालत ने इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 25 मार्च की तिथि तय कर दी।

हल्द्वानी के बनभूलपुरा दंगा मामले में मुख्य आरोपी के खिलाफ तीन पृथक पृथक मामले दर्ज हैं। तीनों में यूएपीए के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोपी की ओर से तीनों मामलों में अलग-अलग जमानत प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया है।

गौरतलब है कि इससे पहले वरिष्ठ न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति रवीन्द्र मैठाणी की अगुवाई वाली खंडपीठ इस मामले को सुनने से इनकार कर चुकी है। आज तीसरी बेंच का गठन किया गया।

इसी आरोप में मनोज कुमार तिवारी और पंकज पुरोहित की खंडपीठ दंगा के तीन अन्य आरोपियों को आज जमानत दे चुकी है। जमानत मिलने वालों में शकील अहमद, असलम चौधरी, और अब्दुल रहमान शामिल हैं।

उल्लेखनीय है कि पिछले साल आठ फ़रवरी को हल्द्वानी के बनभूलपुरा में मलिक के बगीचे में सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने के दौरान दंगा भड़क गया था। भीड़ ने पुलिस और प्रशासन पर पथराव के साथ ही हमला कर दिया था।

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