तेहरान , जून 01 -- ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कालिबाफ ने सोमवार को अमेरिका-इजरायल को सख्त चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी कर ईरान पर सैन्य दबाव बढ़ाना और लेबनान के आम नागरिकों की जान लेना भारी पड़ेगा और इसकी कीमत आखिरकार अमेरिका-इजरायल को चुकानी होगी।

सोमवार को अपने 'एक्स' हैंडल से पोस्ट करते हुए श्री कालिबाफ ने कहा कि ईरानी जहाजों पर अमेरिका की लगायी गयी समुद्री नाकेबंदी और लेबनान में 'नरसंहार करने वाले यहूदी शासन' की ओर से किये जा रहे बढ़ते युद्ध अपराध यह दर्शाते हैं कि अमेरिका युद्धविराम का पालन करने में पूरी तरह नाकाम रहा है।

उन्होंने लिखा, "समुद्री नाकेबंदी और नरसंहार करने वाले यहूदी शासन के लेबनान में युद्ध अपराधों को बढ़ावा देना इस बात का साफ सबूत है कि अमेरिका युद्धविराम की शर्तों को नहीं मान रहा है।"अमेरिका के साथ अप्रत्यक्ष बातचीत में शामिल इस वरिष्ठ ईरानी नेता ने चेतावनी दी कि लगातार की जा रही हिंसक कार्रवाइयों का अंजाम आखिरकार भुगतना ही पड़ेगा।

श्री कालिबाफ ने कहा, "हर फैसले की एक कीमत होती है और एक न एक दिन बिल चुकाना ही पड़ता है। वक्त आने पर सब हिसाब बराबर हो जायेगा।"उनके ये बयान ऐसे समय में आये हैं, जब इजरायल के युद्धविराम समझौते के लगातार उल्लंघन की खबरें मिल रही हैं। इसमें लितानी नदी के उत्तर में बार-बार घुसपैठ करना, रिहायशी इलाकों पर हमले और दक्षिणी लेबनान के इलाकों को खाली करने के आदेश शामिल हैं।

खबरों के मुताबिक, अप्रैल में लागू हुए युद्धविराम के बावजूद इन हरकतों की वजह से भारी संख्या में आम नागरिक हताहत हुए हैं और बुनियादी ढांचे को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है। क्षेत्र में बढ़ते इस तनाव ने मानवीय और सुरक्षा स्थितियों के बदतर होने की चिंताओं को और बढ़ा दिया है।

लेबनान की बेका घाटी में 'फेडरेशन ऑफ लेबर एंड हेल्थ यूनियंस' ने दक्षिणी लेबनान के नबातीह को निशाना बनाकर किये गये हालिया इजरायली हमलों की कड़ी निंदा की है और इन्हें एक 'खतरनाक उकसावा' करार दिया है।

पाकिस्तान की मध्यस्थता में ईरान-अमेरिका के बीच हुआ अस्थायी युद्धविराम आठ अप्रैल को लागू हुआ था। इसके बाद दोनों देशों के बीच अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए सहमति पत्र पर बातचीत चल रही है, हालांकि ईरानी जहाजों की समुद्री नाकेबंदी जैसी अमेरिकी मांगों पर दोनों पक्षों के बीच मतभेद बने हुए हैं।

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सोमवार को कहा कि लेबनान में युद्धविराम इस संघर्ष को समाप्त करने के लिए होने वाले किसी भी व्यापक समझौते का अभिन्न हिस्सा है। इसके साथ ही उन्होंने इजरायल पर क्षेत्रीय तनाव भड़काने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा, "हमारा क्षेत्र यहूदी शासन की ओर से लगातार की जा रही युद्ध भड़काने की कोशिशों का सामना कर रहा है। यह सिर्फ आज या कल की बात नहीं है। पिछले 80 वर्षों में यहूदी शासन ने अमेरिकी समर्थन के साथ इस क्षेत्र के देशों के खिलाफ एक स्थायी और अंतहीन युद्ध छेड़ रखा है।" उन्होंने आगे कहा कि हालिया घटनाक्रम आठ अप्रैल के युद्धविराम का एक 'स्पष्ट और घोर उल्लंघन' हैं।

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस बात को दोहराया है कि ईरान-अमेरिका के बीच हुआ युद्धविराम 'स्पष्ट रूप से लेबनान सहित सभी मोर्चों पर लागू होने वाला युद्धविराम है'।

श्री अराघची ने 'एक्स' पर लिखा, "किसी एक मोर्चे पर इसका उल्लंघन सभी मोर्चों पर युद्धविराम का उल्लंघन माना जायेगा। किसी भी उल्लंघन के परिणामों के लिए अमेरिका-इजरायल पूरी तरह जिम्मेदार हैं।"उनके ये बयान ऐसे समय में आये हैं, जब इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोमवार को बेरूत के हिजबुल्लाह-नियंत्रित दक्षिणी उपनगरों पर हमलों के आदेश दिये हैं। यह कार्रवाई उस युद्ध को और भड़काने का संकेत देती है, जिसने अमेरिका-ईरान संघर्ष को सुलझाने की मध्यस्थता की कोशिशों को बेहद जटिल बना दिया है।

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