पंचकूला , जुलाई 29 -- हरियाणा सरकार ने मंगलवार को पंचकूला के सेक्टर-3 स्थित ताऊ देवी लाल स्टेडियम में आयोजित राज्य स्तरीय प्रवेश कार्यक्रम में 3,586 नवनियुक्त समूह-घ कर्मचारियों को नियुक्ति-पत्र सौंपे।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने नवनियुक्त कर्मचारियों का स्वागत करते हुए कहा कि यह केवल सरकारी नौकरी मिलने का अवसर नहीं, बल्कि जनसेवा का संकल्प लेने का दिन है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अब सरकारी नौकरियां "न खर्ची, न पर्ची और न सिफारिश", बल्कि केवल योग्यता, प्रतिभा और पारदर्शी प्रक्रिया के आधार पर दी जा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज हजारों परिवारों के वर्षों पुराने सपने साकार हुए हैं। उन्होंने कहा कि किसी परिवार में किसान पिता की मेहनत रंग लाई है, कहीं मजदूर माता-पिता के संघर्ष का फल मिला है तो कहीं भाई-बहनों के त्याग और सहयोग ने युवाओं को इस मुकाम तक पहुंचाया है। उन्होंने नवनियुक्त कर्मचारियों के अभिभावकों को भी बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता उनके धैर्य, विश्वास और कठिन परिश्रम की भी जीत है।
अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने भावुक अंदाज में कहा, "हर ख्वाब को हकीकत मिली, हर आंख में उजियारा है, मेहनत करने वाले हर युवा का अब अपना बुलंद सितारा है।" इसके बाद उन्होंने दोहराया कि "न खर्ची चली, न पर्ची चली, बस योग्यता का सम्मान है, यही भरोसा, यही सुशासन हरियाणा सरकार की पहचान है।"मुख्यमंत्री ने पूर्व की भर्ती व्यवस्था पर निशाना साधते हुए कहा कि एक समय ऐसा था जब योग्य युवाओं को नौकरी के लिए सिफारिश, परिवारवाद और क्षेत्रवाद का सामना करना पड़ता था। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने सत्ता संभालते ही स्पष्ट कर दिया था कि किसी भी युवा का भविष्य किसी नेता की जेब में रखी पर्ची से नहीं, बल्कि उसकी मेहनत और प्रतिभा से तय होगा। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता केवल प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय की स्थापना का माध्यम भी है।
उन्होंने नवनियुक्त कर्मचारियों से कहा कि जिस ईमानदार व्यवस्था ने उन्हें सरकारी सेवा का अवसर दिया है, अब उनकी जिम्मेदारी है कि वे उसी ईमानदारी और निष्पक्षता के साथ जनता की सेवा करें तथा सरकार और आम नागरिकों के बीच विश्वास की मजबूत कड़ी बनें।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने पिछले डेढ़ वर्ष में 42,500 युवाओं को सरकारी नौकरी दी है, जबकि पिछले साढ़े 11 वर्षों में 1.83 लाख से अधिक युवाओं की नियुक्ति पूरी पारदर्शिता और योग्यता के आधार पर की गई है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष आयोजित सामान्य पात्रता परीक्षा (सीईटी) के दूसरे चरण के तहत विभिन्न विभागों में भर्ती प्रक्रिया भी तेज़ी से आगे बढ़ रही है।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में पंजाब सरकार पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि जो राजनीतिक दल कभी परीक्षा-पत्र लीक के मुद्दे पर आंदोलन करते थे, आज उन्हीं के शासन वाले पंजाब में लगातार पेपर लीक की घटनाएं सामने आ रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे युवाओं के भविष्य के साथ विश्वासघात हो रहा है और उनकी मेहनत पर पानी फेरा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार ने परीक्षा प्रणाली को निष्पक्ष और सुरक्षित बनाने के लिए ठोस कदम उठाए हैं। नीट-स्नातक परीक्षा में अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद व्यापक जांच कराई गई और लोक परीक्षा अधिनियम-2026 के तहत संगठित परीक्षा अपराधों के लिए 10 वर्ष तक की कैद और न्यूनतम 10 करोड़ रुपये के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। साथ ही ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतें गठित करने का निर्णय भी लिया गया है।
कार्यक्रम में हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने अपने जीवन का अनुभव साझा करते हुए कहा कि संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में दो प्रयासों के बावजूद उनका चयन नहीं हो पाया था। बाद में सेना की इंजीनियरिंग सेवा में रहते हुए वरिष्ठ अधिकारी के प्रोत्साहन पर उन्होंने अंतिम प्रयास किया और भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) में चयनित हुए। उन्होंने नवनियुक्त कर्मचारियों से कहा कि जीवन में असफलताएं अंत नहीं होतीं, बल्कि सफलता की नई शुरुआत होती हैं। उन्होंने युवाओं से अपनी टीम का मनोबल ऊंचा रखने और सदैव सकारात्मक सोच के साथ कार्य करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के समापन पर मुख्यमंत्री ने कहा कि नवनियुक्त कर्मचारी "विकसित भारत-विकसित हरियाणा" के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि आज से वे केवल सरकारी कर्मचारी नहीं, बल्कि जनता के विश्वास, सुशासन और पारदर्शी प्रशासन के प्रहरी भी हैं। उन्होंने सभी नवनियुक्त कर्मचारियों और उनके परिवारों को शुभकामनाएं देते हुए विश्वास जताया कि वे ईमानदारी, संवेदनशीलता और समर्पण के साथ प्रदेश की सेवा करेंगे।
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