चंडीगढ़ , अप्रैल 27 -- कांग्रेस ने हरियाणा विधानसभा के विशेष सत्र का बहिष्कार करते हुए सदन के बाहर समानांतर सत्र आयोजित किया। पार्टी ने यह कदम इस आधार पर उठाया कि परिसीमन और महिला आरक्षण जैसे विषय राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं आते।

विपक्ष के नेता भूपिंदर सिंह हुड्डा की अध्यक्षता में हुई बैठक में कांग्रेस विधायकों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि वे सत्र में भाग नहीं लेंगे और टीए-डीए भी स्वीकार नहीं करेंगे। उनका कहना था कि सरकार संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग कर रही है और जनता के पैसे की बर्बादी हो रही है।

कांग्रेस ने विधानसभा परिसर के बाहर समानांतर सत्र आयोजित कर महिला आरक्षण के समर्थन में प्रस्ताव पारित किया। पार्टी ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी महिला आरक्षण लागू करने में देरी कर रही है और इस मुद्दे पर भ्रम फैला रही है।

श्री हुड्डा ने कहा कि महिला आरक्षण का कानून पहले ही संसद द्वारा पारित किया जा चुका है और इसे लागू करने में अनावश्यक देरी की जा रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने जानबूझकर परिसीमन को महिला आरक्षण से जोड़कर प्रक्रिया को जटिल बनाया है।

कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि भाजपा की नीतियां महिला विरोधी हैं और यदि सरकार की मंशा स्पष्ट होती तो मौजूदा संसदीय ढांचे में ही आरक्षण लागू किया जा सकता था। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में बेरोजगारी, महंगाई, किसानों की समस्याएं और कानून-व्यवस्था जैसे गंभीर मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए यह विशेष सत्र बुलाया गया।

समानांतर सत्र में महंगाई, बेरोजगारी, किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी), एसवाईएल नहर और नशे की समस्या जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की गई। कांग्रेस नेताओं ने मांग की कि महिला आरक्षण अधिनियम, 2023 को तुरंत प्रभाव से लागू किया जाए।

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