चंडीगढ़ , अप्रैल 30 -- हरियाणा सरकार ने निवेश को बढ़ावा देने और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' सुधारने के लिए विनियमन में ढील देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। प्रस्तावित 'ओम्निबस बिल' के माध्यम से विभिन्न नियामकीय बदलावों को एकीकृत विधायी ढांचे में शामिल किया जाएगा।
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई उच्च स्तरीय बैठक में डी-रेगुलेशन फेज-2 के तहत 28 प्राथमिकता वाले सुधार क्षेत्रों की समीक्षा की गई। इन सुधारों का उद्देश्य अनुपालन बोझ कम करना, स्वीकृति प्रक्रियाओं को तेज करना और व्यवसायों के लिए सरल वातावरण तैयार करना है।
सरकार भूमि और निर्माण नियमों को सरल बनाने पर विशेष जोर दे रही है। लगभग 70 प्रतिशत क्षेत्र में 'चेंज ऑफ लैंड यूज' (सीएलयू) की आवश्यकता समाप्त कर दी गई है, जबकि अन्य क्षेत्रों में स्वचालित स्वीकृति प्रणाली लागू करने की योजना है।
हरियाणा उद्यम प्रोत्साहन केंद्र को सशक्त सिंगल-विंडो प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां करीब 30 दिनों में स्वीकृति देने का लक्ष्य रखा गया है। पारदर्शिता के लिए डिजिटल डैशबोर्ड भी तैयार किया जा रहा है।
एमएसएमई सेक्टर को राहत देते हुए प्लॉट उप-विभाजन, गतिविधियों में बदलाव और संपत्ति हस्तांतरण की प्रक्रियाएं सरल की जा रही हैं। प्रस्तावित 'राइट टू बिजनेस एक्ट' के तहत स्व-घोषणा के आधार पर कारोबार शुरू करने की अनुमति मिलेगी।
इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए 500 करोड़ रुपये का 'सक्षम' फंड प्रस्तावित है, जिससे पुराने औद्योगिक क्षेत्रों का उन्नयन किया जाएगा। साथ ही, अग्नि सुरक्षा और अपशिष्ट प्रबंधन के लिए पीपीपी मॉडल पर कार्य किया जाएगा।
सरकार ने अनावश्यक लाइसेंस खत्म करने की दिशा में भी कदम बढ़ाए हैं, जिससे कारोबारियों को राहत मिलेगी और निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित