चंडीगढ़ , अक्टूबर 21 -- हरियाणा में बिजली क्षेत्र के निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों ने बुधवार को हरियाणा विद्युत पारेषण निगम लिमिटेड (एचवीपीएनएल), दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएन) और उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (यूएचबीवीएन) के सभी क्षेत्रीय कार्यालयों और मुख्यालयों में समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस की प्रतियां जलाकर विरोध जताया।
हरियाणा कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त फोरम के नेता रविंद्र घंघास ने बुधवार को कहा कि हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (एचईआरसी) द्वारा गुरुग्राम और नूंह में इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस दिए जाने से बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों में रोष है। उन्हें आशंका है कि इस नीति को राज्य के अन्य क्षेत्रों में भी लागू किया जा सकता है।फोरम ने अगस्त में बिजली मंत्री के साथ हुई सहमति के अनुसार संतोषजनक कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए 22 से 24 अक्टूबर तक तीन दिवसीय राज्यव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है।
मीडिया सलाहकार वी. के. गुप्ता के अनुसार, ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने हरियाणा के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर गुरुग्राम और नूंह में इलेवन पावर को दिए गए समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस रद्द करने के लिए हस्तक्षेप करने की मांग की है।
फेडरेशन ने कहा कि ऐसा करने से प्रस्तावित हड़ताल को टाला जा सकता है। फेडरेशन ने बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों की मांगों पर विचार करने तथा आंदोलन के दौरान उनके खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक या उत्पीड़नकारी कार्रवाई नहीं करने की भी अपील की है।
फेडरेशन ने कहा कि यदि हरियाणा में सार्वजनिक बिजली क्षेत्र को बचाने के लिए कर्मचारियों को हड़ताल करनी पड़ती है,तो देश के अन्य राज्यों के बिजली इंजीनियर और कर्मचारी भी चुप नहीं रह सकते। उसने जनहित, निर्बाध बिजली आपूर्ति, औद्योगिक शांति और राज्य के बिजली क्षेत्र के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए सरकार से तत्काल निर्णायक कदम उठानेकी मांग की है।
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