चंडीगढ़ , मार्च 13 -- हरियाणा सरकार ने 'प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान' को नई धार देते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तीन क्रांतिकारी उपकरण लागू किए हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा के अनुसार, हरियाणा अब टीबी की स्क्रीनिंग, मरीजों की निगरानी और जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान के लिए त्रिस्तरीय एआई प्रणाली का उपयोग करने वाला प्रमुख राज्य बन गया है।
डॉ मिश्रा के अनुसार, राज्य ने केंद्रीय टीबी विभाग के सहयोग से बनी यह त्रिस्तरीय एआई रणनीति न केवल प्रारंभिक स्क्रीनिंग में मदद कर रही है, बल्कि मरीजों की निगरानी और अत्यधिक जोखिम वाले भौगोलिक क्षेत्रों की पहचान करने में भी निर्णायक साबित हो रही है।
इस नई तकनीक के अंतर्गत 'कफ अगेंस्ट टीबी' (सीएटीबी) और 'वल्नरेबिलिटी मैपिंग फॉर ट्यूबरकुलोसिस (वीएम-टीबी )' उपकरणों को फरवरी 2025 में प्रारंभ किया गया, जबकि 'प्रेडिक्शन ऑफ एडवर्स टीबी आउटकम्स ' (पीएटीओ) अप्रैल 2023 से ही प्रभावी रूप से कार्य कर रहा है। इनमें से सीएटीबी एक मोबाइल आधारित एप्लिकेशन है जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से व्यक्ति की खांसी की आवाज और लक्षणों का विश्लेषण करती है। यह तकनीक उन दूरदराज के क्षेत्रों में बेहद कारगर है जहाँ इंटरनेट की सुविधा सीमित है। अब तक 609 स्वास्थ्य केंद्रों पर इस प्रणाली के माध्यम से 140 संभावित टीबी मामलों की पहचान कर उन्हें अग्रिम जांच के लिए भेजा गया है।
वहीं, पीएटीओ टूल राष्ट्रीय निक्षय पोर्टल के विशाल डेटा का सूक्ष्म विश्लेषण कर उन रोगियों का पूर्वानुमान लगाता है, जिनमें उपचार को बीच में ही छोड़ देने या स्वास्थ्य बिगड़ने का जोखिम अधिक होता है।
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