हनुमानगढ़ , अगस्त 04 -- राजस्थान में हरियाणा क्षेत्र से सिंचाई एवं पेयजल के लिये अपेक्षित मात्रा में पानी प्राप्त नहीं होने के कारण जल संसाधन विभाग राजस्थान के अधिकारियों ने मंगलवार को हरियाणा के टोहाना स्थित बलियाला हेड का दौरा करके वस्तुस्थिति का जायजा लिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार निरीक्षण दल में जल संसाधन विभाग नोहर की अधिशासी अभियंता प्रियंका चौधरी, भादरा के अधिशासी अभियंता तिलोक कुमावत और नोहर के सहायक अभियंता मुकेश सुथार शामिल रहे।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने टोहाना के अधिशासी अभियंता श्याम ढींगरा के साथ सिद्धमुख-नोहर फीडर एवं फतेहाबाद शाखा का संयुक्त निरीक्षण किया और सीपी-4 एवं सीपी-5 पर राजस्थान को अपेक्षाकृत कम पानी मिलने के संबंध में विस्तृत चर्चा की।
इस अवसर पर अधिशासी अभियंता श्याम ढींगरा ने बताया कि पंजाब क्षेत्र से भाखड़ा मुख्य लाइन शाखा में करीब पांच हजार क्यूसेक पानी की मांग के मुकाबले वर्तमान में केवल 3800 क्यूसेक पानी ही प्राप्त हो रहा है। इसके कारण राजस्थान के साथ साथ हरियाणा का भी सिंचाई तंत्र भी गंभीर रूप से प्रभावित है और सभी क्षेत्रों में सीमित जल उपलब्धता के अनुसार पानी का वितरण किया जा रहा है।
नोहर एवं भादरा के अधिकारियों ने आग्रह किया कि वर्तमान जल संकट की स्थिति में राजस्थान की नहरों को भी समानुपातिक आधार पर पर्याप्त पानी उपलब्ध कराया जाए, जिससे किसानों को राहत मिल सके। इस पर अधिशासी अभियंता टोहाना ने आश्वस्त किया कि फतेहाबाद ब्रांच में पानी की मात्रा बढ़ा दी गई है, जिसका सकारात्मक प्रभाव शीघ्र ही नोहर एवं भादरा क्षेत्र में चल रहे सिंचाई जल पर दिखाई देगा।
बैठक के दौरान सिद्धमुख-नोहर फीडर की वर्तमान स्थिति पर भी चर्चा हुई। अधिशासी अभियंता श्याम ढींगरा ने बताया कि फीडर कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त होने के कारण अपनी निर्धारित क्षमता 829 क्यूसेक के स्थान पर वर्तमान में केवल करीब 550 क्यूसेक पानी ही वहन कर पा रहा है।
इस पर भादरा के अधिशासी अभियंता तिलोक कुमावत ने अवगत कराया कि सिद्धमुख-नोहर फीडर ,फतेहाबाद ब्रांच एवं नोहर फीडर की किनारों की मरम्मत के लिये विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने के लिए राजस्थान सरकार द्वारा प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति (एएफएस) जारी की जा चुकी है। डीपीआर स्वीकृत होने के बाद फीडर के किनारों की मरम्मत का कार्य कराया जाएगा, जिससे इसकी वहन क्षमता बढ़ेगी और भविष्य में नोहर एवं भादरा क्षेत्र को निर्धारित मात्रा में सिंचाई जल उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी।
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