पानीपत , अगस्त 13 -- राष्ट्रीय अंग प्रत्यारोपण कार्यक्रम के राष्ट्रीय समन्वयक डॉ. नरेश पुरोहित ने कहा कि हरियाणा में अंगदान को लेकर लोगों की सोच में तेजी से सकारात्मक बदलाव आ रहा है तथा राज्य में अब तक 7,940 लोगों ने अंगदान का संकल्प लिया है, जबकि पंजाब में यह संख्या 11,274 तक पहुंच चुकी है।

विश्व अंगदान दिवस के अवसर पर गुरुवार को पानीपत स्थित एनसी मेडिकल कॉलेज द्वारा आयोजित वेबिनार 'अंगदान महादान' को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए डॉ. पुरोहित ने बताया कि हरियाणा में जींद जिला 1,076 पंजीकरण के साथ पहले स्थान पर है। इसके बाद गुरुग्राम में 973 और फरीदाबाद में 791 लोगों ने अंगदान का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि देश में अंग प्रत्यारोपण की जरूरत और उपलब्ध अंगों के बीच अभी भी बड़ा अंतर है। वर्तमान में 1,05,560 मरीज प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा सूची में हैं, जिनमें 73,646 किडनी और 23,396 लीवर प्रत्यारोपण का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि औसतन हर 20 मिनट में एक नया मरीज इस सूची में शामिल हो रहा है।

डॉ. पुरोहित ने कहा कि वर्ष 2013 में देश में करीब 4,900 अंग प्रत्यारोपण हुए थे, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या बढ़कर 20,138 से अधिक हो गयी। इसके बावजूद जरूरत के मुकाबले अंगों की उपलब्धता काफी कम है। वर्ष 2020 से 2024 के बीच 2,805 मरीजों की अंग प्रत्यारोपण का इंतजार करते हुए मृत्यु हुई। उन्होंने बताया कि हर साल दो लाख से अधिक नये मरीज किडनी प्रत्यारोपण की जरूरत वाली श्रेणी में आते हैं, जबकि करीब 14 हजार किडनी प्रत्यारोपण ही हो पाते हैं। इसी तरह लीवर और हृदय प्रत्यारोपण की जरूरत वाले मरीजों की संख्या भी बड़ी है। पिछले वर्ष करीब 5,100 लीवर और केवल 239 हृदय प्रत्यारोपण हुए।

वेबिनार में विशेषज्ञों ने कहा कि अंगदान को बढ़ावा देने के लिए अस्पतालों के साथ-साथ समाज और परिवारों को भी जागरूक करना जरूरी है। एक व्यक्ति मृत्यु के बाद अपने अंगदान से आठ लोगों तक की जिंदगी बचाने में योगदान दे सकता है। उन्होंने बताया कि किडनी, लीवर, हृदय, फेफड़े, आंत और पैंक्रियाज के अलावा कॉर्निया, त्वचा और हड्डियों जैसे ऊतकों का भी दान किया जा सकता है।

विशेषज्ञों ने कहा कि अंगों की उपलब्धता बढ़ाना देश की प्रत्यारोपण व्यवस्था के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है।

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