चंडीगढ़ , अप्रैल 22 -- हरियाणा ने सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में राष्ट्रीय मानकों को पार करते हुए देश में अग्रणी स्थान हासिल किया है। राज्य ने दिसंबर 2026 तक सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में 100 प्रतिशत एनक्यूएएस (राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक) प्रमाणन का लक्ष्य निर्धारित किया है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि राष्ट्रीय गुणवत्ता कार्यक्रमों के तहत अब तक 1,560 से अधिक स्वास्थ्य सुविधाओं को प्रमाणित किया जा चुका है, जिससे प्रमाणन दर 57 प्रतिशत तक पहुंच गयी है। यह दिसंबर 2025 के लिए तय 50 प्रतिशत लक्ष्य से अधिक है।
हरियाणा ने एनक्यूएएस और कायाकल्प पहल के तहत कई राष्ट्रीय उपलब्धियां दर्ज की हैं। अप्रैल 2017 में पंचकुला का सिविल अस्पताल देश का पहला एनक्यूएएस प्रमाणित जिला अस्पताल बना था।
इसके बाद 2018 में कृष्णा नगर, गमरी का शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 2022 में फरीदाबाद का सिविल अस्पताल 'मुस्कान' प्रमाणन प्राप्त करने वाले पहले संस्थान बने। वहीं, 2024 में सोनीपत के रायपुर स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर उप-केंद्र को वर्चुअल मूल्यांकन के जरिए प्रमाणित किया गया। राज्य के 21 में से लगभग सभी जिला अस्पताल (95 प्रतिशत) प्रमाणित हो चुके हैं। इसके अलावा 16 उप-जिला अस्पताल (57 प्रतिशत), 134 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (35 प्रतिशत) और 1,342 आयुष्मान आरोग्य मंदिर उप-केंद्र (65 प्रतिशत) भी गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरे हैं।
कायाकल्प योजना के तहत स्वच्छता, संक्रमण नियंत्रण और जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। वर्ष 2025-26 में 2,548 स्वास्थ्य संस्थानों ने आंतरिक मूल्यांकन और 2,645 ने सहकर्मी मूल्यांकन पूरा किया। इनमें से 416 संस्थान बाहरी मूल्यांकन के लिए पात्र पाये गये।
1,539 संस्थानों ने 70 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल कर कायाकल्प प्रोत्साहन के लिए पात्रता प्राप्त की है। इनमें सभी 21 जिला अस्पताल, 40 उप-जिला अस्पताल और 1,000 से अधिक उप-केंद्र शामिल हैं। दो संस्थानों को पर्यावरण अनुकूल कार्यप्रणाली के लिए विशेष पुरस्कार भी दिये गये हैं।
राज्य सरकार द्वारा कायाकल्प कार्यक्रम के तहत 5.39 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन दिये जाएंगे, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को और मजबूत किया जाएगा।
डॉ. मिश्रा ने कहा कि 2026 तक 100 प्रतिशत प्रमाणन का लक्ष्य निरंतर निगरानी, क्षमता निर्माण और बुनियादी ढांचे में सुधार के माध्यम से हासिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हरियाणा की यह पहल सुलभ, मानकीकृत और मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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