चंडीगढ़ , सितंबर 03 -- हरियाणा ने ग्रामीण क्षेत्रों के प्रत्येक घर तक नल से स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के बाद अब जल संरक्षण, अपव्यय रोकने और जल आपूर्ति व्यवस्था को दीर्घकालिक रूप से मजबूत करने पर फोकस बढ़ा दिया है। लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री रणबीर गंगवा ने नई दिल्ली में जल शक्ति मंत्रालय के दो दिवसीय विभागीय शिखर सम्मेलन में राज्य की जल आपूर्ति, संरक्षण और सीवरेज संबंधी पहलों की जानकारी दी।
गंगवा ने कहा कि बढ़ती आबादी और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए पानी की प्रत्येक बूंद का विवेकपूर्ण उपयोग जरूरी है। भूजल संरक्षण के लिए अंधकारमय क्षेत्रों में रिचार्ज कुएं बनाए जा रहे हैं। स्वीकृत 31 रिचार्ज कुओं में से 26 स्थापित हो चुके हैं, जबकि 12 चालू हैं। करीब 235 पुराने और बंद ट्यूबवेलों को भी रिचार्ज कुओं में बदलने की योजना है।
उन्होंने बताया कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से उपचारित पानी का कृषि, बागवानी, उद्योग, निर्माण और ताप विद्युत संयंत्रों में इस्तेमाल किया जा रहा है। वर्तमान में करीब 655 एमएलडी उपचारित जल का पुन: उपयोग हो रहा है। सरकार का लक्ष्य मार्च 2031 तक उपचारित जल के 100 प्रतिशत पुन: उपयोग का है।
जल आपूर्ति योजनाओं के संचालन में सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने के लिए ग्राम पंचायतों और ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों को जिम्मेदारी दी जा रही है। अब तक 1,486 ग्राम पंचायतों ने समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं।
महाग्राम योजना के तहत 10 हजार से अधिक आबादी वाले 132 गांवों में शहरी तर्ज पर जल आपूर्ति और सीवरेज सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। इनमें 27 गांवों में काम पूरा हो चुका है, जबकि 31 में कार्य जारी है।
मंत्री ने पानी की बर्बादी रोकने के लिए ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में मीटरिंग व्यवस्था लागू करने की तैयारी की जानकारी भी दी। वहीं, मानसून के दौरान जलभराव से निपटने के लिए 89 शहरों में नालियों और सीवरेज नेटवर्क की सफाई व निगरानी की गई है।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य हरियाणा में पर्याप्त और स्वच्छ पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों को सुरक्षित रखना है।
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