हरिद्वार , मार्च 21 -- उत्तराखंड के हरिद्वार जनपद में आपदा प्रबंधन व्यवस्थाओं को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए के सचिव मनीष भारद्वाज ने शनिवार को जिला आपदा प्रबंधन सभागार में समीक्षा बैठक कर तैयारियों का जायजा लिया।

बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारियों को आपदा से निपटने के लिए समन्वित और तकनीकी रूप से सशक्त व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए गए।

सचिव ने कहा कि हरिद्वार धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्र है, जहां वर्षभर कांवड़ मेला, कुंभ जैसे आयोजनों में भारी संख्या में श्रद्धालुओं का आगमन होता है। ऐसे में किसी भी आपदा की स्थिति में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने जलभराव की समस्या को गंभीरता से लेते हुए नगर क्षेत्र में दीर्घकालिक और वैज्ञानिक ड्रेनेज सिस्टम विकसित करने के निर्देश दिए। साथ ही मानसून से पूर्व सभी तैयारियां पूर्ण करने पर जोर दिया, ताकि वर्षा के दौरान जनजीवन प्रभावित न हो।

हिल बाईपास स्थित मनसा देवी पहाड़ी पर हो रहे भूस्खलन को लेकर भी सचिव ने चिंता जताई और संबंधित विभागों को स्थायी एवं वैज्ञानिक समाधान लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी और सुरक्षा प्रबंध किए जाएं।

आपदा के समय सूचना तंत्र को मजबूत बनाने के लिए "सचेत ऐप" के व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश भी दिए गए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि आमजन को इस ऐप के उपयोग के लिए जागरूक किया जाए, जिससे समय पर अलर्ट जारी किए जा सकें।

बैठक में बाढ़ प्रबंधन की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। सचिव ने निर्देश दिए कि आपदा मित्रों, गंगा प्रहरियों और गंगा तट पर रहने वाले लोगों को व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाए, जिससे आपात स्थिति में त्वरित राहत और बचाव कार्य किए जा सकें।

इस दौरान जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने जनपद में चल रहे आपदा प्रबंधन कार्यों और संसाधनों की जानकारी देते हुए बताया कि सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य कर रहे हैं तथा समय-समय पर मॉक ड्रिल आयोजित की जा रही है।

बैठक में अपर जिलाधिकारी पी.आर. चौहान, एसपी सिटी अभय प्रताप सिंह, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी मीरा रावत सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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