पटना , अगस्त 05 -- बिहार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. रामचंद्र प्रसाद ने बुधवार को कहा कि हरित बिहार के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए पौधरोपण के साथ-साथ व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाना समय की आवश्यकता है। श्री प्रसाद ने 'जल-जीवन-हरियाली दिवस' के अवसर पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि वर्ष 2028 तक राज्य के हरित आवरण को 17 प्रतिशत तक पहुंचाने के लक्ष्य की प्राप्ति में आमजन की सक्रिय भागीदारी निर्णायक भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि चतुर्थ कृषि रोड मैप में भी इसे प्रमुखता से शामिल किया गया है। 'इस दौरान 'आज पौधशाला, कल वन-भविष्य का हरित निवेश' विषय पर जल-जीवन-हरियाली अभियान से जुड़े सभी 15 क्रियान्वयन विभागों के साथ विस्तृत परिचर्चा भी आयोजित की गई।

मंत्री ने कहा कि बिहार-झारखंड विभाजन के बाद वर्ष 2001 में राज्य का वन आवरण मात्र 6.07 प्रतिशत था। हरित क्षेत्र बढ़ाने के उद्देश्य से वर्ष 2012 में हरियाली मिशन की शुरुआत की गई। इसके तहत वित्तीय वर्ष 2012-13 से 2025-26 तक राज्यभर में 46.07 करोड़ पौधों का रोपण किया जा चुका है, जिसके परिणामस्वरूप बिहार का हरित आवरण बढ़कर 15.05 प्रतिशत हो गया है। उन्होंने बताया कि तृतीय कृषि रोड मैप के तहत 15 प्रतिशत हरित आवरण का लक्ष्य हासिल कर लिया गया है, जबकि चतुर्थ कृषि रोड मैप (2023-28) के तहत इसे बढ़ाकर 17 प्रतिशत करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

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