नयी दिल्ली , जनवरी 15 -- केंद्रीय बिजली मंत्री मनोहर लाल ने गुरुवार को कहा कि हरित ऊर्जा की यात्रा में भारत आज दुनिया का नेतृत्व कर रहा है।

केंद्रीय मंत्री ने यहां एक कार्यक्रम में भारत इलेक्ट्रिसिटी सम्मिट 2026 के ब्रोशर और टीजर फिल्म जारी करने के बाद यह बात कही। उन्होंने कहा कि आज भारत का ऊर्जा सेक्टर एक नई चरण में है जहां उसकी पहचान पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा और विश्वसनीयता से होती है। मार्च 2014 में देश की स्थापित ऊर्जा क्षमता 249 गीगावाट थी जो नवंबर 2025 में बढ़कर 510 गीगावाट हो गयी। वहीं, बिजली की कमी 2014 में 4.2 प्रतिशत से घटकर 2025 में लगभग शून्य रह गई है।

उन्होंने कहा कि बिजली उत्पादन और खपत के मामले में भारत आज दुनिया में तीसरे नंबर पर है। बिजली की मांग और देश का विकास साथ-साथ चलते हैं। यही कारण है कि साल 2014 में भारत दुनिया की 10वीं अर्थव्यवस्था था जो आज चौथे स्थान पर पहुंच गया है, और जल्द ही दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है।

मंत्री ने कहा कि कुल बिजली उत्पादन में गैर-जीवाश्म स्रोतों का योगदान 2014 में 32 प्रतिशत था जो आज बढ़कर 2025 में 52 प्रतिशत पर पहुंच गया है। भारत ने साल 2030 तक 50 प्रतिशत से अधिक गैर-जीवाश्म ऊर्जा स्रोतों से बिजली पैदा करने का लक्ष्य रखा था जिसे उसने समय से पांच साल पहले हासिल कर लिया है।

उन्होंने कहा कि सरकार इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल, 2026 लेकर आ रही है जो भविष्य का आधार बनेगा। परमाणु ऊर्जा को नयी ऊंचाई तक ले जाने के लिए हाल ही में संसद में 'शांति' विधेयक पारित किया गया था।

इस सम्मेलन का आयोजन दिल्ली के द्वारका स्थित यशोभूमि में 19 से 22 मार्च तक होगा। इसमें 500 से अधिक कंपनियों के प्रदर्शनी में भाग लेने की उम्मीद है। इन चार दिनों में विभिन्न विषयों पर 50 से अधिक सत्रों का आयोजन होगा।

आज के कार्यक्रम में बिजली मंत्रालय के सचिव पंकज अग्रवाल और अतिरिक्त सचिव पीयूष सिंह भी मौजूद थे।

श्री अग्रवाल ने कहा कि साल 2040 तक देश में बिजली की मांग मौजूदा स्तर से दोगुनी हो जायेगी। हर माह स्थापित क्षमता में चार से पांच गीगावाट का इजाफा हो रहा है। अगले कुछ साल में इसमें 500 अरब डॉलर के निवेश की संभावना है।

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