हमीरपुर , मई 12 -- उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिला प्रशासन ने शिक्षक द्वारा फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्राप्त स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र को मंगलवार को निरस्त कर दिया और प्रमाण पत्र के आधार पर प्राप्त प्राथमिक विद्यालय की नौकरी पर भी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। साथ ही मामले में संलिप्त राजस्व कर्मियों के खिलाफ विभागीय एवं वैधानिक कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी गई है। अतिरिक्त उप जिलाधिकारी केडी शर्मा ने मंगलवार को बताया कि राठ कस्बा निवासी सत्यप्रकाश सिंह ने वर्ष 2004 में स्वयं को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय लोटन सिंह वर्मा का पौत्र दर्शाते हुए स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र प्राप्त किया था। इसी प्रमाण पत्र के आधार पर वर्ष 2005 में उन्हें बेसिक शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्ति मिली थी।
जांच के दौरान परिवार रजिस्टर, राजस्व अभिलेख, आधार संबंधी दस्तावेज और अन्य अभिलेखों का परीक्षण किया गया। जांच में पाया गया कि सत्यप्रकाश सिंह के वास्तविक पिता का नाम मातवर सिंह दर्ज है, जबकि लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से उन्हें स्वर्गीय लोटन सिंह वर्मा का दत्तक पुत्र दर्शाया गया।
प्रशासनिक जांच में यह भी सामने आया कि दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया हिन्दू दत्तक ग्रहण एवं भरण-पोषण अधिनियम 1956 के प्रावधानों के अनुरूप नहीं थी। जिस समय गोद लेने का दावा किया गया, उस समय स्वर्गीय लोटन सिंह वर्मा के दो पुत्र जीवित थे। इसके अलावा कोई विधिवत पंजीकृत गोदनामा या सक्षम साक्ष्य भी प्रस्तुत नहीं किया जा सका।
जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि सत्यप्रकाश सिंह के पुत्र का विवाह स्वर्गीय लोटन सिंह वर्मा के वास्तविक पौत्र की पुत्री से हुआ है। प्रशासन के अनुसार सामाजिक और पारिवारिक दृष्टि से यह संबंध कथित दत्तक संबंधों के दावे को संदिग्ध और अविश्वसनीय बनाता है।
जिलाधिकारी के आदेश पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया गया है। बेसिक शिक्षा अधिकारी को नियुक्ति संबंधी विभागीय कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही तत्कालीन लेखपाल, राजस्व निरीक्षक, तहसीलदार और अन्य संबंधित कर्मियों की भूमिका की जांच कर उनके खिलाफ भी आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।
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