हमीरपुर , सितंबर 22 -- उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में मंगलवार को शहर से करीब एक किलोमीटर दूर कुरारा रोड पर फर्जी जीएसटी अधिकारी बनकर वाहनों से वसूली किए जाने की सूचना से राज्य कर विभाग और पुलिस में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन आरोपी चौपहिया वाहन से फरार हो चुके थे। राज्य कर विभाग की एसी मोबाइल टीम की ओर से कोतवाली में तहरीर दी गई है। वहीं, स्थानीय स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार, कुरारा रोड पर वन विभाग के पास पांच लोग चौपहिया वाहन से फर्जी जीएसटी अधिकारी बनकर वाहनों की जांच और वसूली कर रहे थे। इसी दौरान कानपुर से कालपी बर्तन लेकर जा रहे एक डीसीएम को रोककर चालक से कागजात मांगे गए और उसके साथ कथित रूप से गाली-गलौज की गई।
इस पर व्यापारी ने राज्य कर विभाग की मोबाइल टीम से संपर्क किया। बताया गया कि राज्य कर विभाग की असिस्टेंट कमिश्नर (मोबाइल) पूर्णिमा यादव उस समय झांसी में बैठक में थीं। व्यापारी ने इसके बाद पुलिस को सूचना दी कि कुछ लोग फर्जी जीएसटी अधिकारी बनकर वाहनों से वसूली कर रहे हैं। पुलिस टीम मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक आरोपी वहां से फरार हो चुके थे।
इसके बाद एसटीएफ ने मामले की छानबीन शुरू की और राज्य कर विभाग के डिप्टी कमिश्नर के कार्यालय पहुंचकर घटना के संबंध में जानकारी ली। विभागीय स्तर पर जांच में मौके पर वसूली करने वाले लोगों के फर्जी जीएसटी अधिकारी होने की पुष्टि हुई।
बताया गया कि आरोपियों द्वारा इस्तेमाल की गई बोलेरो का पंजीकरण नंबर महाराष्ट्र का है। घटना के बाद आरोपी हमीरपुर से महोबा की ओर रवाना हुए। पुलिस ने इसकी सूचना महोबा पुलिस को भी दे दी है। मामले की जानकारी झांसी के ग्रेड-वन अधिकारी को भी दी गई है।
राज्य कर विभाग की असिस्टेंट कमिश्नर पूर्णिमा यादव ने बताया कि मामले में हमीरपुर कोतवाली में तहरीर दे दी गई है और रिपोर्ट दर्ज करने की कार्रवाई की जा रही है। उच्चाधिकारियों को भी मामले की जानकारी दे दी गई है। अपर पुलिस अधीक्षक अरविंद वर्मा ने बताया कि मामले की जांच कराई जा रही है और रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दिए गए हैं।
बताया जाता है कि जिले में इससे पहले भी दो बार फर्जी जीएसटी अधिकारी बनकर वसूली किए जाने के मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें एक मामले में गिरफ्तारी भी हुई थी। यह जिले में इस तरह का तीसरा मामला बताया जा रहा है। लगातार ऐसे मामलों के सामने आने के बाद व्यापारी भी सतर्क हो गए हैं। बताया जाता है कि कई बार फर्जी अधिकारियों से धोखा खाने के बाद जब कोई जीएसटी अधिकारी जांच के लिए व्यापारी के यहां पहुंचता है तो व्यापारी स्थानीय राज्य कर कार्यालय से संपर्क कर उसकी पहचान की पुष्टि करते हैं, जिससे ऐसे मामलों का खुलासा हो जाता है।
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