हमीरपुर , मई 15 -- बुंदेलखंड के कृषि उत्पाद अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी अलग पहचान बना रहे हैं। हमीरपुर जिले के राठ क्षेत्र में उगाई जाने वाली चिकोरी की जड़ इटली में कॉफी पाउडर के रूप में धूम मचा रही है, जबकि महोबा की मूंगफली का दाना नेपाल के बाजारों में भारतीय उत्पादों की पहचान मजबूत कर रहा है। ज्येष्ठ कृषि विपणन अधिकारी डॉ. राज सिंह ने शुक्रवार को बताया कि बुंदेलखंड के कई कृषि उत्पाद और औषधीय पौधे विदेशों में तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को और अधिक प्रोत्साहन मिले तो क्षेत्र से बड़े पैमाने पर कृषि निर्यात संभव हो सकता है, जिससे किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

उन्होंने बताया कि राठ क्षेत्र में पैदा होने वाले चिकोरी पौधे की जड़ को इटली में कॉफी पाउडर के रूप में काफी पसंद किया जा रहा है। यह औषधीय पौधा पूरी तरह जैविक (ऑर्गेनिक) माना जाता है और कई बीमारियों में उपयोगी होने के कारण इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। इस वर्ष करीब 18 मीट्रिक टन चिकोरी का निर्यात किया गया, जिससे किसानों को लगभग एक लाख 64 हजार रुपये का लाभ हुआ।

डॉ. सिंह ने बताया कि ऑर्गेनिक इंडिया नामक कंपनी राठ क्षेत्र के किसानों से अनुबंध कर चिकोरी की खेती को बढ़ावा दे रही है। कंपनी किसानों से नौ रुपये प्रति किलोग्राम की दर से चिकोरी खरीदती है और प्रोसेसिंग के बाद इसे छोटे टुकड़ों में काटकर विदेशों में निर्यात करती है।

उन्होंने बताया कि राठ क्षेत्र में तुलसी की पत्तियों का भी बड़े पैमाने पर उत्पादन हो रहा है। सूखाने के बाद इसका पाउडर तैयार कर विदेशों में औषधीय उपयोग के लिए भेजा जाता है। वहीं महोबा की मूंगफली का दाना नेपाल में काफी लोकप्रिय हो रहा है। इस वर्ष महोबा से 341.6 मीट्रिक टन मूंगफली दाना निर्यात किया गया, जिसकी कीमत करीब दो करोड़ 53 लाख रुपये आंकी गई है। किसानों को मूंगफली की खेती के लिए लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है।

डॉ. सिंह ने बताया कि हाल ही में बांदा मंडलायुक्त की अध्यक्षता में आयोजित एपीडा की बैठक में बुंदेलखंड के कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि निर्यात योग्य अनाज, फल और औषधीय पौधों का उत्पादन बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं।

उन्होंने कहा कि हमीरपुर जिले के कठिया गेहूं और घनौरी मिर्च को जीआई टैग दिलाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं, ताकि इनके निर्यात का रास्ता और मजबूत हो सके। साथ ही निर्यातक कन्हैया लाल किसानों से कृषि उत्पाद खरीदकर विदेशों तक पहुंचाने के प्रयास में जुटे हुए हैं, जिससे बुंदेलखंड के किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाया जा सके।

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