हैदराबाद , जून 05 -- तेलंगाना के कृषि, विपणन, सहयोग और हथकरघा व कपड़ा मंत्री तुम्माला नागेश्वर राव ने शुक्रवार को कहा कि भारत की संस्कृति और परंपराओं को वैश्विक मंच पर ले जाने का श्रेय हथकरघा उद्योग को जाता है।

मंत्री ने हैदराबाद अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रदर्शनी लिमिटेड (एचआईटीईएक्स) के मंच पर राज्य सरकार की 'तेलंगाना राइजिंग' पहल के तहत आयोजित 'थ्रेड पोचमपल्ली' हथकरघा प्रदर्शनी का उद्घाटन करने के बाद यह बात कही। तीन दिन तक चलने वाली यह प्रदर्शनी 7 जून तक जारी रहेगी।

श्री तुम्माला ने कहा कि पोचमपल्ली इकत हथकरघा कला की एक खास पहचान है और उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त है और उन्होंने स्थानीय बुनकरों के हुनर को तेलंगाना के लिए गर्व की बात बताया।

उन्होंने इस अवसर पर सदियों पुरानी हथकरघा परंपरा को बचाने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की जरूरत पर बल दिया। मंत्री ने पोचमपल्ली इकत कपड़ों को मिले भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग का जिक्र करते हुए कहा कि यह तेलंगाना के बुनकरों की सृजनात्मकता और कारीगरी को मिली वैश्विक पहचान को दर्शाता है।

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पोचमपल्ली रुमाल और इकत साड़ियों को और अधिक बढ़ावा देने की भी बात कही।

मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने पिछले ढाई सालों में हथकरघा उद्योग के विकास और बुनकरों के कल्याण के लिए 1,400 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए हैं।

उन्होंने बताया कि राज्य में भारतीय हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईएचटी) की स्थापना की गई है ताकि हथकरघा उद्योग से जुड़े परिवारों के बच्चे आधुनिक डिजाइन, नयी प्रौद्योगिकी और बाजार के हिसाब से जरूरी हुनर में महारत हासिल कर सकें और वैश्विक स्तर पर मुकाबला कर सकें।

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