पटना , सितंबर 10 -- पटना उच्च न्यायालय ने गुरुवार को एक फैसले में वर्ष 2000 के एक हत्या मामले में करीब 21 वर्ष जेल में बिताने वाले रंजीत कुमार झा को बरी करते हुए समस्तीपुर की त्वरित अदालत की ओर से वर्ष 2009 में दी गई सजा को निरस्त कर दिया।

न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद और न्यायमूर्ति कुमार मनीष की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया, जिसकी प्रति आज अपलोड की गई।

रंजीत कुमार झा को पवन कुमार झा की हत्या के मामले में वर्ष 2009 में दोषी करार देकर सजा सुनाई गई थी। अभियोजन पक्ष का आरोप था कि 3,300 रुपये की चोरी को लेकर हुए विवाद के बाद रंजीत ने पवन को गोली मार दी थी।

उच्च न्यायालय ने अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों में गंभीर खामियां पाते हुए कहा कि मामला मुख्य रूप से ऐसे गवाहों के बयानों पर आधारित था, जिनकी आरोपी से दुश्मनी थी। अदालत ने इसे ''साक्ष्य के अभाव का मामला'' करार दिया और पुलिस की जांच के तरीके पर गंभीर चिंता व्यक्त की।

खंडपीठ ने तत्कालीन मुसरीघरारी थानाध्यक्ष और जांच अधिकारियों पर पुलिस की लापरवाही तथा हितबद्ध गवाहों के साथ मिलीभगत के आरोपों का भी संज्ञान लिया। अदालत ने प्राथमिकी से संबंधित विसंगतियों को भी रेखांकित किया, जिसमें प्राथमिकी पहले से दर्ज किए जाने का आरोप और उसे अदालत भेजने में चार दिन की देरी शामिल थी।

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