बुडापेस्ट , जुलाई 14 -- हंगरी की संसद ने सोमवार को राष्ट्रपति तमास शुल्योक को पद से हटाने का रास्ता साफ करते हुए संविधान का 17वां संशोधन पारित कर दिया। श्री शुल्योक को पूर्व प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बान का करीबी माना जाता है, जिनकी पार्टी अप्रैल में 16 वर्ष बाद सत्ता से बाहर हो गयी थी।

प्रधानमंत्री पीटर माज्यार की तिस्ज़ा पार्टी ने संसद में अपने दो-तिहाई बहुमत के बल पर संशोधन पारित कराया। इसके तहत राष्ट्रपति शुल्योक के साथ ही संवैधानिक न्यायालय के प्रमुख पीटर पोल्ट का कार्यकाल भी समाप्त कर दिया गया। मई में नयी सरकार के गठन के बाद इसे संसद का अब तक का सबसे नाटकीय घटनाक्रम माना जा रहा है। अप्रैल में हुए चुनाव में तिस्ज़ा पार्टी ने श्री ओर्बान की फिदेस्ज़ पार्टी को अप्रत्याशित रूप से पराजित कर सत्ता हासिल की थी।

संविधान के अनुसार श्री शुल्योक के पास संशोधन पर हस्ताक्षर करने या उसे संवैधानिक न्यायालय के पास भेजने के लिए पांच दिन का समय है। यदि वह संशोधन को न्यायालय के पास भेजते हैं तो प्रधानमंत्री माज्यार ने उनके खिलाफ महाभियोग की कार्यवाही शुरू करने की चेतावनी दी है, जिससे वह स्वतः निलंबित हो जाएंगे। सरकार ने उनसे संवैधानिक संकट टालने के लिए इस्तीफा देने का भी आग्रह किया है। मतदान से पहले विपक्षी फिदेस्ज़ पार्टी के सांसद सदन से बहिर्गमन कर गये। पार्टी ने आरोप लगाया कि तिस्ज़ा सरकार इस संशोधन के जरिये किसी भी सार्वजनिक पदाधिकारी को तत्काल प्रभाव से हटाने की मनमानी शक्ति हासिल करना चाहती है।

बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार पीटर रोना ने कहा कि विडंबना यह है कि फिदेस्ज़ अब उसी सत्ता मॉडल का शिकार हो रही है, जिसे उसने स्वयं विकसित किया था। उन्होंने कहा कि 2011 में ओर्बान सरकार द्वारा बनाये गये संविधान में "विजेता सब कुछ ले जाता है" की अवधारणा को संस्थागत रूप दिया गया था।

वर्ष 2010 से 2026 तक सत्ता में रही फिदेस्ज़ ने दो-तिहाई बहुमत के आधार पर राज्य की संस्थाओं का पुनर्गठन किया और कई स्वतंत्र संवैधानिक पदों पर अपने समर्थकों की नियुक्ति की थी। संशोधन के पक्ष में मतदान के परिणाम घोषित होते ही तिस्ज़ा पार्टी के 141 सांसदों ने खड़े होकर तालियां बजाईं।

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