रांची , अक्टूबर 28 -- झारखंड के भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता के.के. गुप्ता ने कहा कि हेमन्त सरकार कैबिनेट से 62 प्रस्ताव पास की जिसमें एमएमडीआर संसोधन बिल और एसआईआर के विरोध में दिनांक 25 एवं 26 नवंबर को झारखंड विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर प्रस्ताव पास कराने की तैयारी कर रही है,यह पूर्णतः संघीय ढांचा पर प्रहार है।
श्री गुप्ता गुप्ता ने कहा कि झारखण्ड विधानसभा को हेमन्त सरकार केन्द्र विरोधी राजनीति का मंच बनाकर जनता में भ्रम की स्थिति पैदा करना चाहती है इनकी मंसूबा सफल नहीं होने जा रही है।
पहले हेमन्त सरकार को जनता को अपने 7 वर्ष के कार्यकाल में खनिज और खनन का पुरा हिसाब- किताब सार्वजनिक करनी चाहिए। हेमन्त सरकार को यह बताना चाहिए कि झारखण्ड की खनन नीति क्या है,खनन से राजस्व प्राप्ति की क्या स्थिति है, खनन उत्पादन का प्रदर्शन एवं इसके अलोक में बिनीमयन का पुरा लेखा जोखा प्रस्तुत करता चाहिए। सरकार को यह भी बताना चाहिए कि इन सात वर्षो में केन्द्र से कितने खनिज क्षेत्र आवंटित हुए और उसके अलोक में कितने खनिज क्षेत्र की नीलामी हुई और कितने में खनन उत्पादन जारी है या कितने में बंद है अभी शुरू नहीं हुए।
श्री गुप्ता गुप्ता ने कहा कि सरकार को इन सभी पहलुओं पर दूसरे खनिज सम्पन्न बगल के राज्यों जैसे उड़ीसा,मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ की तुलना में झारखण्ड की रिपोर्ट कार्ड क्या है प्रस्तुत करना चाहिए। हेमन्त सरकार अपनी विफलताओं का ठीकरा केन्द्र सरकार पर फोड़कर झारखण्ड की जनता की झूठी सहानुभूति लेना चाहती है।
जबकि सच्चाई यह है कि पुरे देश में एक समान और स्थिर राजकोषीय प्रबंधन को ध्यान में रखकर खनन क्षेत्र में निवेश की स्थिरता बने और अधिकतम उत्पादन और विनीमियन मेजर माइंस एंड मिनरल्स वस्तुओ की देश की आवश्यकतानुसार जरूरत निर्बाध रूप से पुरा हो जिसमें किसी राज्य के साथ अहित न हो यह सभी बातो को लेकर नई एमएमडीआर संसोधित बिल को कानून बनाया हैइससे झारखण्ड जैसे खनिज सम्पन्न राज्य को भी इसके दूरगामी लाभ मिलेगा साथ ही खनन आधारित विकास को गति मिलेगा। हेमन्त सरकार अलग अलग प्रकार से कभी सड़को पर और अब विधानसभा के पटल पर झूठी बातों को रखकर झारखण्ड वासियो में भ्रम की स्थिति पैदा करना चाहती है, जो कभी सफल नहीं होगी।
वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के समर्थन में चलने वाली झारखण्ड की जेएमएम प्रमुख वाली सरकार एसआईआर प्रक्रिया पर प्रश्नचिन्ह लगा रही, जबकि कांग्रेस या इंडी गठबंधन का कोई दल वोटचोरी के समर्थन में कोई ठोस सबूत न तो चुनाव आयोग को, न राष्ट्रपति को और न ही माननीय सर्वोच्च न्यायालय को दिखा पाई है।
उल्टा राज्य सरकार झारखण्ड में अपने कर्मियों के माध्यम से जितनी पारदर्शिता और सक्रियता के साथ एसआईआर में जितना सहयोग करना चाहिए उतना सहयोग नहीं कर रही है। यह सरकार की इक्षाशक्ति में कमी है और इससे पवित्र मतदातासूची निर्माण में बाधा पहुंचाने का कलंक भी।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को मिलने वाली है जब जिस अनुपात में ममता सरकार को पश्चिम बंगाल में हो रहे एसआईआर में सहयोग करना चाहिए उसे नहीं कर सर्वोच्च न्यायालय में बार बार आवेदन देकर पुरे प्रक्रिया को बाधित करने का काम किया था जिसका सबक विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी की सरकार को जनता ने सिखाने का काम किया कहीं वही हालत हेमन्त सरकार की भी झारखण्ड में न हो जाये।
इसलिए भारतीय जनता पार्टी का स्पस्ट मानना है कि जनता की दिलो को तभी जीता जा सकता है जब जनता के लिए धरातल पर निरंतर सेवा भाव से पूर्ण सक्रियता के साथ जनता की आवश्यकनुसार विकास कार्य किया जाय न कि झारखण्ड की जनता में एमएमडीआर संसोधन बिल और एसआईआर की आड़ में भ्रम पैदा कर रिजिम चेंज के सपने को पुरा करने का शॉर्टकट रास्ता चुना जाये। भारत कोई नेपाल और बांग्लादेश नहीं है। यह मोदी के नेतृत्व में मज़बूत भारत है। यहां इन देशविरोधी ताकतों की दाल गलने वाली नहीं है।
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