डेरा बस्सी , अक्टूबर 26 -- भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती मांग और चिकित्सा सुविधाओं के व्यापक विस्तार को देखते हुए रियल एस्टेट के क्षेत्र में अनेक अवसर उभर रहे हैं।

एसोसिएशन ऑफ स्टडीज ऑफ हेल्थकेयर के प्रधान अन्वेषक डॉ. नरेश पुरोहित ने डेरा बस्सी स्थित एलएम थापर स्कूल ऑफ मैनेजमेंट की ओर से सोमवार को स्वास्थ्य अवसंरचना के विकास की चुनौतियों पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि वर्ष 2035 तक देश को वैश्विक मानकों के अनुरूप स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए करीब 2.6 अरब वर्ग फुट अतिरिक्त स्वास्थ्य संबंधी निर्मित क्षेत्र और लगभग 29 लाख अतिरिक्त अस्पताल बिस्तरों की आवश्यकता पड़ने का अनुमान है।

डॉ. पुरोहित ने कहा कि भारत में प्रति एक हजार आबादी पर लगभग 1.6 अस्पताल बिस्तर उपलब्ध हैं, जबकि वैश्विक औसत 3.3 बिस्तर है। वर्ष 2025 में देश का कुल स्वास्थ्य संबंधी निर्मित क्षेत्र लगभग 2.1 अरब वर्ग फुट रहने का अनुमान था। इस अंतर को पाटने के लिए अस्पतालों और अन्य चिकित्सा सुविधाओं के बुनियादी ढांचे का बड़े पैमाने पर विस्तार करना होगा।

इंडियन मेडिकल एकेडमी फॉर प्रिवेंटिव हेल्थ के कार्यकारी सदस्य डॉ. पुरोहित ने राज्यों के बीच स्वास्थ्य सुविधाओं की असमानता का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़, ओडिशा, मध्य प्रदेश और झारखंड में गैर-संचारी रोगों के बोझ की तुलना में अस्पतालों में बिस्तरों की उपलब्धता कम है। इससे द्वितीयक और तृतीयक स्तर की स्वास्थ्य सेवाओं की संभावित कमी का संकेत मिलता है। कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना में अपेक्षाकृत बेहतर स्वास्थ्य ढांचा और अधिक घरेलू आय विशेष चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार की संभावनाएं बढ़ाती हैं।

उन्होंने कहा कि जरूरत के अनुरूप निर्मित भवन (बिल्ट-टू-सूट) मॉडल स्वास्थ्य ढांचे के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसके तहत चिकित्सा संस्थानों की परिचालन और नियामकीय जरूरतों के अनुसार विशेष भवन तैयार किए जा सकते हैं। इससे स्वास्थ्य सेवा प्रदाता भवन निर्माण के बजाय चिकित्सा उपकरणों, तकनीक और उपचार सेवाओं में अधिक पूंजी लगा सकेंगे, जबकि संपत्ति मालिकों को दीर्घकालीन पट्टे से अपेक्षाकृत स्थिर आय मिल सकती है।

डॉ. पुरोहित के अनुसार, अस्पतालों के अलावा जांच केंद्रों, डे-केयर सर्जरी केंद्रों, पुनर्वास क्लीनिकों, नेत्र चिकित्सा केंद्रों, आईवीएफ केंद्रों, स्वास्थ्य जांच और टीकाकरण सुविधाओं का विस्तार भी इस क्षेत्र में नए अवसर पैदा कर रहा है।संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने कहा कि 1.4 अरब से अधिक आबादी वाले देश में स्वास्थ्य सुविधाओं का मौजूदा ढांचा अब भी पर्याप्त नहीं है। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में अस्पताल बिस्तरों की कमी पर विशेष चिंता जताई और स्वास्थ्य ढांचे के विस्तार के लिए सरकार का ध्यान आकर्षित किया।

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