लखनऊ , फरवरी 16 -- उत्तर प्रदेश विधानसभा में सोमवार को स्वास्थ्य सेवाओं और जल जीवन मिशन में कथित अनियमितताओं को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार बहस हुई। इस दौरान दोनों पक्षों ने एकदूसरे पर आरोप लगाए।
उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने सदन को बताया कि प्रदेश के प्रत्येक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पर हार्ट अटैक से जुड़े मामलों के लिए लगभग 40 हजार रुपये कीमत का जीवनरक्षक इंजेक्शन उपलब्ध कराया गया है।
उन्होंने कहा कि मैसिव हार्ट अटैक या उससे संबंधित लक्षणों के साथ आने वाले मरीज को यह इंजेक्शन तत्काल लगाया जाता है, जिससे अगले 24 घंटे तक उसे दोबारा अटैक का खतरा कम रहता है। इस अवधि में मरीज को निकटतम मेडिकल कॉलेज में रेफर कर आगे का इलाज सुनिश्चित किया जाता है।
पाठक ने बताया कि प्रदेश के 50 से अधिक मेडिकल कॉलेज इस प्रकार के इलाज के लिए अधिकृत किए गए हैं। साथ ही एक व्हाट्सएप ग्रुप भी बनाया गया है, जिसमें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र या सीएचसी पर मरीज के पहुंचते ही उसकी रिपोर्ट साझा की जाती है, ताकि मेडिकल कॉलेज स्तर पर तत्काल उपचार की तैयारी की जा सके।
इस दौरान सपा विधायक समरपाल सिंह ने किडनी प्रत्यारोपण की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि किडनी ट्रांसप्लांट में अत्यधिक समय लगता है और पूरी प्रक्रिया सात दिन के भीतर पूरी होनी चाहिए। उन्होंने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी किडनी प्रत्यारोपण की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की।
जवाब में बृजेश पाठक ने कहा कि सरकार की कोशिश है कि किडनी ट्रांसप्लांट कम से कम समय में हो और सात दिन से भी कम समय में प्रक्रिया पूरी करने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश में किडनी प्रत्यारोपण फिलहाल केवल रक्त संबंधियों (ब्लड रिलेटिव) के बीच ही संभव है। सीएचसी स्तर पर किडनी ट्रांसप्लांट की मांग पर उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि इसकी व्यवहारिकता पर भी विचार करना होगा।
इधर, जल जीवन मिशन की कथित असफलता को लेकर विपक्ष ने कार्यस्थगन प्रस्ताव के जरिए चर्चा की मांग की। विपक्ष का आरोप था कि प्रदेश में योजना प्रभावी ढंग से लागू नहीं हो पाई है।
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