बेंगलुरु , सितंबर 25 -- एक अनजान व्यक्ति की दयालुता ने बेंगलुरु के एक परिवार को जिंदगी का दूसरा मौका दिया, जब एक व्यक्ति को घातक दिल का दौरा पड़ा और उसकी हालत इतनी बिगड़ी कि उसे अंततः हृदय प्रत्यारोपण की जरूरत पड़ी।
किरण कुमार की पत्नी ने उस अज्ञात अंगदाता परिवार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा, "आज हमारा परिवार उनके दिल की हर एक धड़कन का आनंद ले रहा है।"उस परिवार के अंगदान के फैसले से ही उनके पति की जान बच सकी।
फोर्टिस के शुक्रवार को 'अटैक द अटैक' (हर धड़कन. हर चेतावनी) हृदय जागरूकता कार्यक्रम में अपने परिवार के मुश्किल वक्त को याद करते हुए उन्होंने बताया कि सात मई को उनके पति को दिल का दौरा पड़ा था। इससे एक दिन पहले उन्हें स्थानीय अस्पताल ले जाया गया था, जहां उनकी बीमारी को गंभीर एसिडिटी मानकर इलाज किया गया और ईसीजी रिपोर्ट भी सामान्य बतायी गयी थी। जब उनकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ, तो परिवार बीजीएस ग्लेनइगल्स अस्पताल पहुंचा, जहां डॉ. रवींद्रनाथ रेड्डी के नेतृत्व वाली टीम ने उनके इलाज की कमान संभाली।
उन्होंने बताया कि उनके पति करीब आठ दिनों तक गंभीर स्थिति में आईसीयू में रहे और उनकी स्टेंटिंग की गयी। बाद में डॉक्टरों ने परिवार को बताया कि सही बीमारी का पता लगाने के चक्कर में लगभग 48 घंटे बीत गये थे, जिससे इलाज के लिए बेहद महत्वपूर्ण 'गोल्डन आवर' हाथ से निकल गया था।उन्होंने बताया कि इसके बाद डॉक्टरों ने उनके दिल, फेफड़ों और गुर्दों से जुड़ी जटिलताओं का इलाज किया, जिसके बाद अंततः हृदय प्रत्यारोपण अनिवार्य हो गया। उन्होंने कहा, "उस नाजुक मोड़ पर परिवार का साथ और डॉक्टरों की पूरी टीम का सहयोग मिसाल बना, जिसके चलते हृदय प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक हो सका।"उन्होंने आगे कहा कि इस प्रत्यारोपण ने उनके परिवार को उनका पति और बच्चों को उनका पिता वापस लौटा दिया।
उन्होंने भावुक होकर कहा, "मेरे बच्चों को अपने पिता की कमी महसूस नहीं हो रही है और मुझे अपने पति की, यह सब केवल अंगदान के फैसले की वजह से संभव हो पाया है।"उन्होंने डॉक्टरों और उस अंगदाता परिवार का दिल से धन्यवाद किया, जिनकी पहचान उनसे आज भी अनजान है।
यह भावुक कर देने वाली कहानी उस कार्यक्रम का हिस्सा थी, जहां अन्य हृदय रोगियों ने भी यह साझा किया कि कैसे जाहिर तौर पर अच्छे स्वास्थ्य के बावजूद दिल की अचानक आयी बीमारियों ने उनकी जिंदगी बदल दी।
बन्नेरघट्टा रोड स्थित फोर्टिस अस्पताल में रोबोटिक कार्डिएक सर्जरी कराने वाले डॉ. सनी पुवाया ने बताया कि उन्हें हाई बीपी या मधुमेह (डायबिटीज) की कोई शिकायत नहीं थी और वे राष्ट्रीय स्तर के एथलीट भी रह चुके थे। इसके बावजूद, सीने में हल्की जकड़न और सांस फूलने की समस्या के बाद करायी गयी जांचों में दिल की गंभीर स्थिति का खुलासा हुआ।
एंजियोग्राफी के बाद उन्होंने फोर्टिस पहुंचने से पहले सात हृदय विशेषज्ञों और कार्डिएक सर्जनों से सलाह ली। डॉ. पुवाया ने बताया कि डॉ. सुदर्शन जीटी ने उनकी बीमारी को बेहद सरल भाषा में समझाया, जिससे उन्हें इलाज कराने का हौसला मिला। उन्होंने याद करते हुए कहा, "जब डॉक्टर ने मुझसे पूछा कि मैं आगे क्या करना चाहता हूं तो मैंने कहा कि मैं इसे तुरंत ठीक कराना चाहता हूं। जब उन्होंने पूछा कब? तो मैंने कहा, 'जितनी जल्दी हो सके'।" उन्होंने अस्पताल के डॉक्टरों, नर्सों और बाकी स्टाफ की तारीफ करते हुए अपने इलाज के अनुभव को 'बेहतरीन' बताया।
एक अन्य मरीज राजेंद्र कृष्णमूर्ति ने ग्लेनइगल्स बीजीएस केंगेरी अस्पताल के डॉक्टरों के दिल में दो ब्लॉकेज की पहचान किये जाने पर अपने सदमे और हैरानी को साझा किया। उन्होंने बताया कि डॉ. रवींद्रनाथ रेड्डी, डॉ. प्रसाद और उनकी टीम ने उनका सही मार्गदर्शन किया और पूरे इलाज को आसान बनाते हुए हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया।
राजेंद्र ने बताया कि हाल के वर्षों में उन्होंने कई नियमित जांचें करायी थीं, जिनमें ईसीजी और इकोकार्डियोग्राम शामिल थे और वे सभी नॉर्मल आये थे।उन्होंने इस बात पर जोर देते हुए कहा, "मुझे लगता था कि अगर कोई इंसान बाहर से फिट दिखता है, तो उसका दिल भी तंदुरुस्त होगा। लेकिन यह एक गलतफहमी है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि शारीरिक रूप से फिट होने का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि आपका दिल पूरी तरह स्वस्थ है।
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