पटना , अक्टूबर 24 -- ्वास्थ्य के क्षेत्र में नए आविष्कारों को बढ़ावा देने और उन्हें आम लोगों के लिए उपयोगी बनाने की दिशा में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स)पटना और भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत कार्यरत बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंस काउंसिल ने मिलकर एक महत्वपूर्ण पहल की। इस क्रम में शनिवार को एम्स पटना के सभागार में 'वैश्विक स्वास्थ्य नवाचार के लिए नियामकीय तैयारी' विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसका आयोजन एम्स पटना के नवाचार केंद्र, एम्स पटना इन्क्यूबेशन एंड इनोवेशन काउंसिल के सहयोग से किया गया।
कार्यशाला का उद्देश्य डॉक्टरों, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप और स्वास्थ्य क्षेत्र में नए उत्पाद विकसित करने वालों को नियामकीय प्रक्रियाओं की जानकारी देना था, जिससे वे सुरक्षित, प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य उत्पाद विकसित कर सकें। इसमें सरकारी अधिकारियों, नियामक विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। चर्चा का मुख्य उद्देश्य शोध और नए विचारों को ऐसे उपयोगी उत्पादों में बदलने के रास्ते तलाशना था, जिनका लाभ मरीजों और आम लोगों को मिल सके।
कार्यक्रम में भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के वरिष्ठ सलाहकार एवं वैज्ञानिक-एच तथा बीआईआरएसी के प्रबंध निदेशक डॉ. धनंजय के. तिवारी; केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन के उप औषधि नियंत्रक (भारत) श्री शिव कुमार; नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बायोलॉजिकल्स, नोएडा की निदेशक डॉ. नीलिमा मिश्रा; तथा बीआईआरएसी की उप महाप्रबंधक एवं नियामकीय मामलों, नीति और पैरवी विभाग की प्रमुख डॉ. सोनिया गांधी सहित कई प्रमुख विशेषज्ञ शामिल हुए।
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