नयी दिल्ली | , सितंबर 19 -- केंद्रीय आयुष मंत्री प्रतापराव गणपतराव जाधव ने स्वास्थ्य और वेलनेस के क्षेत्र में आधुनिक चिकित्स पद्धि के साथ साथ आयुष प्रणालियों के प्रयोग को बढ़ाने के सरकार के प्रयासों को रेखांकित करते हुए इसके प्रति जागरूकता बढ़ाये जाने की आवश्कता पर बल दिया है। श्री जाधव ब्रिटेन की कंपनी कायू रिचुअल्स की ओर से स्वास्थ्य और वेलनेस पर जागरूकता बढ़ाने की पहल पर केंद्रित एक कार्यक्रम को डिजिटल माध्यम से संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कायू रिचुअल्स की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि जिसमें आयुर्वेद, आधुनिक चिकित्सा तथा वेलनेस से जुड़े अलग-अलग विचारों को एक मंच पर लाया गया। कार्यक्रम में यौन स्वास्थ्य, आयुर्वेद, आधुनिक चिकित्सा और स्वस्थ जीवनशैली पर हुई चर्चा की गयी। चर्चा जिसमें स्वास्थ्य और वेलनेस से जुड़े विशेषज्ञों ने कहा कि स्वस्थ रहने वाली आदतों की शुरुआत बीमार पड़ने के बाद नहीं, बल्कि उससे पहले होनी चाहिए।

कायू रिचुअल्स की संस्थापक एवं सीईओ प्रीति चौधरी ने कहा कि छह महीने पहले कायू रिचुअल्स सिर्फ एक विचार था और आज यह एक ऐसे समुदाय के रूप में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि कंपनी इस सोच के साथ काम कर रही है कि स्वस्थ रहने वाली आदतों की शुरुआत बीमार पड़ने के बाद नहीं, बल्कि उससे पहले होनी चाहिए। उन्होंने कहा, "यौन स्वास्थ्य और फेफड़ों के स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में हमारा विस्तार हमारे लिए एक नया और महत्वपूर्ण कदम है। हम चाहते हैं कि ऐसे विषयों पर लोग बिना झिझक बात करें और सही जानकारी हासिल करें।" उन्होंने कहा कि आयुर्वेद, आधुनिक चिकित्सा और पारंपरिक ज्ञान, व्यक्ति को केंद्र में रखकर, स्वास्थ्य को बेहतर समझने में अपनी भूमिका निभा सकते हैं।

कार्यक्रम में 'भारत में यौन स्वास्थ्य' विषय पर भी विशेष चर्चा में डॉ. जागृति और डॉ. अभिषेक साहा ने यौन स्वास्थ्य, प्रजनन क्षमता और जीवनशक्ति से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी। विशेषज्ञों ने कहा कि यौन स्वास्थ्य को लेकर लोगों के बीच सही जानकारी और खुली बातचीत की जरूरत है। कई बार झिझक के कारण लोग इन विषयों पर समय रहते बात नहीं करते। ऐसे में सही जानकारी और जागरूकता लोगों को बेहतर स्वास्थ्य संबंधी फैसले लेने में मदद कर सकती है। 'आयुर्वेद, आधुनिक चिकित्सा और आज की जीवन शैली' विषय पर चर्चा में डॉ. तनु और डॉ. अक्षरा अरोड़ा ने बताया गया कि आज की व्यस्त जीवनशैली में खान-पान, दिनचर्या और स्वास्थ्य पर ध्यान देना पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है। विशेषज्ञों ने आयुर्वेद के पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक चिकित्सा को समझने के साथ-साथ रोजमर्रा की स्वस्थ आदतों पर ध्यान देने की जरूरत बतायी।

इस कार्यक्रम में उत्पाद तैयार करने की प्रक्रिया, अनुसंधान, गुणवत्ता जांच और लोगों की बदलती जरूरतों के अनुसार नए उत्पाद तैयार करने पर चर्चा हुई।

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