जयपुर , फरवरी 19 -- राजस्थान में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने कहा है कि राज्य सरकार के गत दो वर्ष में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए बजट, अवसंरचना और मानव संसाधन तीनों में बड़ी वृद्धि हुई है। कई मामलों में यह वृद्धि पूर्ववर्ती सरकार के पांच वर्ष से काफी अधिक है।

श्री खींवसर बुधवार को विधानसभा में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की अनुदान मांगों पर हुई बहस का जवाब दे रहे थे। चर्चा के बाद सदन ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की 158 अरब 55 करोड़ 37 लाख 75 हजार रुपए एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की 61 अरब 30 करोड़ 85 लाख 94 हजार रुपए की अनुदान मांगें ध्वनिमत से पारित कर दी।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की स्वास्थ्य को लेकर इस प्रतिबद्धता से शहरों से लेकर गांव-ढाणी तक चिकित्सा सेवाएं गुणवत्ता और सुगमता से मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता इससे पता चलती है कि डब्ल्यूएचओ के अनुसार किसी भी देश की जीडीपी का 7.5 प्रतिशत बजट स्वास्थ्य पर खर्च होना चाहिए। यह प्रसन्नता की बात है कि राजस्थान का प्रतिशत इस लिहाज से 7.5 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार के समय वर्ष 2019-20 में स्वास्थ्य का बजट 13 हजार 542 करोड़, वर्ष 2020-21 में 13 हजार 395 करोड़, 2021-22 में 17 हजार 82 करोड़, 2022-23 में 20 हजार 127 करोड़ तथा 2023-24 में 22 हजार 572 करोड़ था, जबकि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में वर्ष 2024-25 में यह बजट बढ़कर 27 हजार 713 करोड़, 2025-26 में 31 हजार 880 करोड़ तथा 2026-27 में 32 हजार 531 करोड़ रूपए हो गया। बजट में हो रही यह वृद्धि राज्य सरकार की स्वास्थ्य के क्षेत्र के संबंध में प्रतिबद्धता दर्शाती है।

उन्होंने स्वास्थ्य के आधारभूत ढांचे का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश में 20 हजार से अधिक चिकित्सा संस्थान उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2016 तक प्रदेश में मात्र आठ मेडिकल कॉलेज थे लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की हर जिले में मेडिकल कॉलेज की नीति के कारण वर्ष 2016 के बाद 23 नए मेडिकल कॉलेज राजस्थान में स्थापित हुए। इससे देश एवं प्रदेश के विद्यार्थियों को चिकित्सा शिक्षा के लिए विदेश नहीं जाना पड़ रहा। उन्होंने बताया कि चिकित्सा शिक्षा विभाग में करीब 10 हजार 540 करोड़ की लागत से 186 नए चिकित्सा संस्थान बनाए जा रहे हैं। गत दो वर्ष में अस्पतालों में 6400 बैड की वृद्धि की है।

श्री खींवसर ने बताया कि पूर्ववर्ती सरकार के पहले दो साल में एक भी नई पीएचसी नहीं खोली गई, जबकि वर्तमान सरकार ने छह नई पीएचसी स्थापित की। इसी प्रकार पूर्ववर्ती सरकार के दो साल में 53 सीएचसी, जबकि वर्तमान सरकार में 84, उप जिला अस्पताल एक के मुकाबले 61, जिला अस्पताल 3 के मुकाबले 14, सेटेलाइट हॉस्पिटल दो के मुकाबले 18 खोले गए। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने चिकित्सा महाविद्यालयों से संबद्ध सभी अस्पतालों में 100 करोड़ की लागत से अटल आरोग्य फूड कोर्ट खोलने तथा जयपुर, अजमेर, बीकानेर, उदयपुर, कोटा एवं जोधपुर के मेडिकल कॉलेजों के मुख्य अस्पतालों में 500 करोड़ रुपए की लागत से अत्याधुनिक विश्राम गृह बनाने की घोषणा की है। इससे रोगियों एवं उनके परिजनों को बड़ी राहत मिलेगी।

चिकित्सा मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार के दो साल में 35 हजार से अधिक भर्तियां की गई हैं और 14 हजार से अधिक पदों पर भर्तियां प्रक्रियाधीन हैं। साथ ही, नवचयनित कार्मिकों को बिना किसी सिफारिश के राज हैल्थ पोर्टल के माध्यम से वरीयता के आधार पर रिक्त पदों पर नियुक्त किया गया है। इससे शहरों से लेकर ट्राइबल एवं सीमावर्ती सहित सभी क्षेत्रों में पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध हुआ है। विशेषज्ञों चिकित्सकों के रिक्त पद भरने से अधिकांश ट्रोमा सेंटर एवं एफआरयू क्रियाशील हो गए हैं। इससे चिकित्सा सेवाएं बेहतर हुई हैं। उन्होंने बताया कि पूर्ववर्ती सरकार के पांच साल में मात्र 29 हजार पदों पर ही भर्तियां की गईं थी।

श्री खींवसर ने कहा कि मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना से प्रदेशवासियों को उच्च गुणवत्ता की स्वास्थ्य सेवाएं निःशुल्क मिल रही हैं। उन्होंने बताया कि इस योजना से करीब दो वर्ष में 37 लाख से अधिक लोगों को 7500 करोड़ से अधिक का निःशुल्क उपचार मिला है, जबकि पूर्ववर्ती सरकार के पूरे पांच साल में 50 लाख लोगों को करीब 8 हजार करोड़ का उपचार मिला।

उन्होंने बताया कि पहले स्वास्थ्य बीमा योजना में 1806 पैकेज थे, अब 2179 पैकेज हैं। पहले 1761 अस्पताल सूचीबद्ध थे, अब 1945 अस्पताल सूचीबद्ध हैं। इसी प्रकार अब इस योजना में बुखार से लेकर रोबोटिक सर्जरी, इम्प्लांट सहित सभी गंभीर रोगों का उपचार उपलब्ध है। करीब 88 प्रतिशत परिवार इस योजना से लाभान्वित हो रहे हैं। हमारी सरकार ने इस योजना में इंटर स्टेट पोर्टेबिलिटी भी लागू की है, जिससे प्रदेश के नागरिक दूसरे राज्यों में एवं दूसरे राज्यों के नागरिक राजस्थान में आकर निःशुल्क उपचार ले सकते हैं।

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