भुवनेश्वर , अगस्त 21 -- ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने शुक्रवार को यह घोषणा की कि स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की जन्मभूमि, अंगुल जिले के गुरुजंग गांव को 'विरासत गांव' के रूप में और गुरुजंग पंचायत को 'आदर्श पंचायत' के रूप में विकसित किया जायेगा।

मुख्यमंत्री माझी ने स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की जन्म शताब्दी के उपलक्ष्य में तालचेर के पास गुरुजंग में आयोजित एक समारोह को संबोधित करते हुए कहा, "स्वामीजी केवल एक व्यक्ति नहीं थे, बल्कि एक महान आदर्श, एक असाधारण संस्था और सनातन धर्म के मार्गदर्शक थे। स्वामीजी ने आधुनिक जीवन के सुख-सुविधाओं का त्याग कर स्वयं को कंधमाल के दूरस्थ और घने जंगलों में रहते हुये वंचित आदिवासी समुदायों की सेवा में समर्पित कर दिया था।

स्वामीजी ने चकपद और जलेस्पत आश्रमों तथा एक बालिका गुरुकुल की स्थापना की, जहां आदिवासी लड़कियों को संस्कृत शिक्षा, सांस्कृतिक मूल्यों और नैतिक शिक्षाओं के माध्यम से सशक्त बनाया गया। साथ ही उनके द्वारा शुरू किया गया धर्मांतरण के विरुद्ध जागरूकता अभियान राज्य भर में सनातनी मूल्यों के सशक्त समर्थन में परिणत हुआ।"श्री माझी ने कहा कि राज्य सरकार ने स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के बलिदान और आजीवन सेवा को सम्मानित करने के लिये कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं।

उन्होंने यह जानकारी दी कि फूलबानी सरकारी मेडिकल कॉलेज का नाम बदलकर स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती मेडिकल कॉलेज कर दिया गया है। इसके अलावा, स्वामीजी के कार्यों से जुड़े जलेस्पता आश्रम, आश्रम विद्यालय और कन्याश्रम की विरासत के विकास और संरक्षण के लिए मुख्यमंत्री विशेष सहायता (सीएमएसए) कोष से 13 करोड़ रुपये स्वीकृत किये गये हैं।

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