वाराणसी , मार्च 7 -- सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में शनिवार को कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी द्वारा रचित ग्रंथों को विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में सम्मिलित करने के विषय पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में देश के वरिष्ठ संत स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी, युवा चेतना के राष्ट्रीय संयोजक रोहित कुमार सिंह सहित कई विद्वान एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे। वक्ताओं ने कहा कि स्वामी करपात्री जी का साहित्य भारतीय धर्म-दर्शन, सनातन वैदिक परंपरा, सांस्कृतिक चेतना और आध्यात्मिक चिंतन का महत्वपूर्ण स्रोत है। उनके ग्रंथों में वेद, उपनिषद, स्मृति और पुराणों की गहन व्याख्या मिलती है, जो विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा को समझने में सहायक हो सकती है।

कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण, संवर्धन और प्रसार के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि स्वामी करपात्री जी जैसे महान संत और विद्वान का साहित्य भारतीय संस्कृति और दर्शन की अमूल्य धरोहर है। इसे पाठ्यक्रम में शामिल करने से विद्यार्थियों को शास्त्रीय परंपरा और भारतीय चिंतन की गहराई को समझने का अवसर मिलेगा।

उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के नियमों के अनुरूप विधिक प्रक्रिया अपनाते हुए उनके ग्रंथों को पाठ्यक्रम में शामिल करने का प्रयास किया जाएगा। स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी ने कहा कि स्वामी करपात्री जी का साहित्य केवल धार्मिक ग्रंथों तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति, समाज व्यवस्था और वैदिक जीवन मूल्यों की गहन व्याख्या भी प्रस्तुत करता है। वहीं रोहित कुमार सिंह ने कहा कि उनके वैचारिक योगदान से युवा पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा से अधिक गहराई से जुड़ सकेगी।

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