लखनऊ , जनवरी 27 -- संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) के निदेशक प्रो. आर.के. धीमन ने कहा है कि हृदय रोग की रोकथाम में जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव सबसे प्रभावी और स्थायी उपाय है। उन्होंने कहा कि वजन, रक्तचाप, मेटाबॉलिक सिंड्रोम और शारीरिक निष्क्रियता पर नियंत्रण कर हृदय संबंधी बीमारियों के बड़े हिस्से को रोका जा सकता है।

राष्ट्रीय प्रत्यक्ष कर अकादमी, प्रज्ञा, गोमतीनगर में आयोजित हृदय स्वास्थ्य जागरूकता एवं सीपीआर प्रशिक्षण कार्यशाला को संबोधित करते हुए प्रो. धीमन ने कहा कि भारत में हृदय रोग का बढ़ता बोझ गंभीर चिंता का विषय है। इसे कम करने के लिए रोकथाम की शुरुआत कम उम्र से होनी चाहिए और यह प्रयास जीवनभर जारी रहना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि स्वस्थ जीवनशैली न केवल बीमारी से बचाव करती है, बल्कि दीर्घकालिक स्वास्थ्य और बेहतर जीवन गुणवत्ता का आधार भी बनती है।

यह कार्यशाला एनएडीटी आरसी लखनऊ द्वारा "अच्छे स्वास्थ्य" विषय पर आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम के अंतर्गत संपन्न हुई। कार्यक्रम का नेतृत्व आईआरएस के अपर महानिदेशक डॉ. नील जैन ने किया, जबकि समन्वय संयुक्त निदेशक सुश्री अन्विका शर्मा ने किया।

एसजीपीजीआईएमएस के कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. आदित्य कपूर ने सीपीआर को चिकित्सीय प्रक्रिया नहीं बल्कि जीवन रक्षक कौशल बताते हुए कहा कि इसे कोई भी सीख सकता है और किसी की जान बचा सकता है। उन्होंने युवाओं में बढ़ते कोरोनरी धमनी रोग, उच्च रक्तचाप और जीवनशैली से जुड़ी समस्याओं पर चिंता जताई तथा कहा कि अचानक हृदय गति रुकने की स्थिति में पहले कुछ मिनट अत्यंत निर्णायक होते हैं। उन्होंने बताया कि सीपीआर में प्रत्येक मिनट की देरी से जीवन बचने की संभावना लगभग 10 प्रतिशत कम हो जाती है।

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