पौड़ी , अगस्त 29 -- उत्तराखंड में पहाड़ की महिलाएं अब रोजगार की तलाश में गांवों से बाहर जाने के बजाय स्थानीय स्तर पर ही स्वरोजगार के नए अवसर तैयार कर आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ रही हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल और ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को प्रशिक्षण, ऋण और आजीविका के लिए आवश्यक सहयोग मिलने से महिलाओं की आर्थिक स्थिति में सुधार के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी मजबूत हो रही है।

पौड़ी विकासखंड के खांड़यूंसैंण निवासी कलावती देवी और पौड़ी मुख्यालय के समीप गगाड़स्यूं क्षेत्र के ग्राम गहड़ निवासी रामेश्वरी देवी स्वरोजगार की ऐसी ही प्रेरणादायी मिसाल पेश कर रही हैं। कलावती देवी मां भगवती स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं। हिमोत्थान सोसाइटी से मिले 20 हजार रुपये के अनुदान से उन्होंने सिलाई मशीन खरीदी। इसके अलावा आरसेटी से समूह की अन्य महिलाओं के साथ 13 दिवसीय जूट बैग निर्माण का प्रशिक्षण भी प्राप्त किया। वर्तमान में वह सिलाई के साथ ब्यूटी पार्लर का संचालन कर रही हैं, जिससे एक अन्य महिला को भी रोजगार मिला है। कलावती के अनुसार उन्हें प्रतिमाह करीब 15 हजार रुपये की आय हो रही है और 10 से 12 हजार रुपये तक की शुद्ध बचत हो जाती है। अब वह जूट बैग निर्माण का कार्य शुरू कर समूह की अन्य महिलाओं को भी इससे जोड़ने की तैयारी में हैं।

वहीं, ग्राम गहड़ की रामेश्वरी देवी डांडा नागराजा स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं। उन्होंने पुलिस लाइन के समीप ग्राम दुकान स्थापित कर स्थानीय पहाड़ी उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराया है। दुकान में मंडुवा, झंगोरा, पहाड़ी दाल, जैम, अचार, बद्री गाय का घी और स्थानीय सब्जियों समेत विभिन्न उत्पादों की बिक्री की जा रही है। इससे रामेश्वरी को प्रतिमाह करीब छह से सात हजार रुपये की शुद्ध आय प्राप्त हो रही है।

रामेश्वरी ने बताया कि वर्ष 2025 में एनआरएलएम, नाबार्ड और हिमोत्थान सोसाइटी के सहयोग से तीन लाख रुपये का सीसीएल ऋण लेकर उन्होंने ग्राम दुकान शुरू की। दुकान के माध्यम से जहां स्थानीय उत्पादों को बाजार मिल रहा है, वहीं यह उनके परिवार की आय का स्थायी जरिया भी बन गई है।

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