नयी दिल्ली , जून 12 -- रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा भारत स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में 25 जून को एक अहम उपलब्धि हासिल करने जा रहा है।

उस दिन रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की स्वदेशी एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल ( अवाक्स ) प्रणाली 'नेत्र' को बेंगलुरु 'सेंटर फॉर एयरबोर्न सिस्टम्स' प्रयोगशाला में अंतिम संचालन मंजूरी मिलने की औपचारिक घोषणा की जायेगी।

इस मंजूरी से देश के पहले स्वदेशी 'एयरबोर्न सर्विलांस और कमांड-एंड-कंट्रोल प्लेटफॉर्म' के सफल संचालन के लिए तैयार होने का पता चलता है। इससे वायु सेना की नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर और शुरुआती चेतावनी (अर्ली वार्निंग) क्षमताओं को मजबूती मिलेगी।

डीआरडीओ ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा, " एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (अवाक्स) प्रणाली नेत्र के लिए अंतिम संचालन मंजूरी (एफओसी) की घोषणा 25 जून को सेंटर फॉर एयरबोर्न सिस्टम्स , बेंगलुरु में की जायेगी। नेत्र जैसी स्वदेशी प्रणाली के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है।"'नेत्र' जिसे वायु सेना की "आसमान में आंख" की संज्ञा दी जाती है देश की घरेलू स्तर पर डिज़ाइन और विकसित पहली अवाक्स प्रणाली है। एम्ब्रेयर प्लेटफॉर्म पर फिट की जाने वाली यह प्रणाली एक साथ कई हवाई और समुद्री लक्ष्यों का पता लगाने और उन्हें ट्रैक करने में सक्षम है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित